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मेडिकल कॉलेज की जमींन पर वन अधिकारियों ने किया कब्जा, प्रबंधन ने भी साधी चुप्पी

पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज को 200 बिस्तरों का हॉस्टल, डॉक्टरों व अन्य स्टॉफ के लिए आवास बनाने नहरपारा बाइपास से लगी वन विभाग की जमीन मिली है।

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मेडिकल कॉलेज की जमींन पर वन अधिकारियों ने किया कब्जा, प्रबंधन ने भी साधी चुप्पी

रायपुर. पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज को 200 बिस्तरों का हॉस्टल, डॉक्टरों व अन्य स्टॉफ के लिए आवास बनाने नहरपारा बाइपास से लगी वन विभाग की जमीन मिली है। कॉलेज को जमीन मिले करीब एक साल से अधिक हो गया फिर भी वन विभाग के अधिकारियों ने कब्जा जमाए रखा है। कॉलेज प्रबंधन भी अफसरों को हटाने चुप्पी साधे हुए है।

गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज के चार हॉस्टलों में से एक 37 साल पुराना यूजी हॉस्टल जर्जर हो चुका है। विगत दिनों कॉलेज प्रबंधन ने इसकी मरम्मत कार्य कराने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को पत्र लिखा था। पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियरों ने जब जायजा लिया तो पाया कि हॉस्टल पूरी तरफ जर्जर हो चुका है। इंजीनियरों ने कॉलेज प्रबंधन को हॉस्टल जर्जर होने की सूचना देकर मरम्मत कार्य करने से इनकार कर दिया।

पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा हॉस्टर कंडम घोषित किए जाने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने किसी भी हादसे में बचने के लिए हॉस्टल में रहने वाले करीब 100 छात्रों को अन्य हॉस्टलों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया। कॉलेज प्रबंधन ने 100 छात्रों को जैसे-तैसे बाकी तीन हॉस्टलों में शिफ्ट तो जरूर कर दिया है लेकिन छात्रों को इससे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

14-17 करोड़ में बनेंगे हॉस्टल और क्वार्टर
नहरपारा बाइपास से लगी वन विभाग की मिली जमीन पर करीब 14 से 17 करोड़ में हॉस्टल और आवास बनाए जाएंगे। करीब डेढ़ साल पहले ही बजट को मंजूरी मिल चुकी है। हॉस्टल के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने दिल्ली के एक कंसल्टेंट को भी नियुक्त कर दिया है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने हॉस्टव व क्वार्टरों की डिजाइन, ड्राइंग समेत पूरा इस्टीमेट सौंप दिया है। कॉलेज प्रबंधन ने बजट के लिए प्रशासकीय स्वीकृत के लिए डीएमई और सचिवालय को भेजा दिया है। उम्मीद है कि आंचार संहिता हटते ही प्रशासकीय स्वीकृत मिल जाएगी और निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

रायपुर के डीएमई डॉ. एल.एल आदिले ने बताया कि इस संदर्भ में गुरुवार को समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। आचार संहिता के कारण बजट की प्रशासकीय स्वीकृत नहीं मिल पाई है।

अटलनगर में काम, रहते हैं यहां
वन मुख्यालय को अटलनगर में शिफ्ट हुए करीब डेढ साल बीते चुके हैं फिर भी अधिकारियों ने यहां के भवन को खाली नहीं किया है। नहरपारा बाइपास से लगी जमीन पर 16 क्वार्टर बने हैं। इसमें आएएस और आईएफएस के आला अधिकारी निवासरत हैं। बताया जाता है कि इन अधिकारियों को अटलनगर में भी क्वार्टर मिले हैं लेकिन अधिकारी यही पर रहते हैं।

विरोध के बाद भी बनाया बंगला
शासन ने अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान जमीन मेडिकल कॉलेज से लेकर बंगला और वन विभाग का रेस्ट हाउस बना दिया। कुछ दिनों बाद ही रेस्ट हाउस के करीब ही वन विभाग का मुख्यालय भवन बना दिया गया। उस दौरान मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों ने इसका कड़ा विरोध किया था, फिर भी शासन ने उनकी एक न सुनी। मेडिकल कॉलेज की जमीन पर ही ऑफिसर कॉलोनी, नर्सिंग कॉलेज, डेंटल कॉलेज, फिजियोथैरेपी कॉलेज भी बनाए गए हैं।

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