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केटीयू के कुलसचिव पर नियम विरुद्ध पद पर बने रहने का आरोप, High Court ने दो हफ्ते के भीतर मांगा जवाब

KTUJM Raipur: याचिका में बताया गया है कि सेवावृद्धि-नियम के अनुसार विश्वविद्यालय में सेवावृद्धि की शक्तियां राज्य सरकार, विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद और कुलपति को भी नहीं हैं। इस विषय पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

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केटीयू के कुलसचिव पर नियम विरुद्ध पद पर बने रहने का आरोप, High Court ने दो हफ्ते के भीतर मांगा जवाब

केटीयू के कुलसचिव पर नियम विरुद्ध पद पर बने रहने का आरोप, High Court ने दो हफ्ते के भीतर मांगा जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ का कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय (Kushabhau Thakre Journalism and Mass Communication University) हमेशा विवादों के केंद्र में रहा है। नियुक्तियों और अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में रहने वाला विश्वविद्यालय इस बार कुलसचिव की कुर्सी को लेकर विवादों में है। नियमों को ताक पर रख कर 60 साल की आयु पूरी होने के बाद भी डॉ. आनंद शंकर बहादुर रजिस्ट्रार पद पर जमे हुए हैं। जबकि, कार्य परिषद और राज्य शासन को भी उन्हें सेवावृद्धि देने का अधिकार नहीं है। इस मामले में सीनियर प्रोफेसर की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन और कुलपति को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने 2 हफ्ते में मांगा जवाब
ताजा विवाद यूनिवर्सिटी में कुलसचिव की कुर्सी पर लगभग चार वर्षों से जमे डॉ. आनंद शंकर बहादुर की सेवानिवृति को लेकर है। विश्वविद्यालय के एक सीनियर प्रोफ़ेसर डॉ. शाहिद अली ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिसमें बताया गया है कि यूनिवर्सिटी में पदस्थ रजिस्ट्रार डॉ. आनंद शंकर बहादुर को रिटायर नहीं किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के नियम के अनुसार उन्हें 60 साल की आयु के बाद रिटायर किया जाना था। उनकी आयु जुलाई 2022 को पूरी हो गई है। लिहाजा, प्रावधान के अनुसार उन्हें रिटायर्ड कर दिया जाना चाहिए था। याचिका में बताया गया है कि सेवावृद्धि-नियम के अनुसार विश्वविद्यालय में सेवावृद्धि की शक्तियां राज्य सरकार, विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद और कुलपति को भी नहीं हैं। इस विषय पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा
डॉ. अली ने अपनी याचिका में बताया विश्वविद्यालय के नियमानुसार लगभग छह माह पहले 17 जुलाई 2022 को 60 साल की आयु पूर्ण होने पर डॉ. आनंद शंकर बहादुर सेवानिवृत्ति और कार्यमुक्त हो जाना था, लेकिन उन्होंने विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्ति संबंधी नियम को दरकिनार करते हुए अनाधिकृत रूप से कुलसचिव के पद का लाभ और सुविधाएं ले रहे हैं। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय में डा आनंद शंकर बहादुर ने अपनी सेवानिवृत्ति के तथ्यों को भी शासन और विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक से छिपाया और इस बीच कुलसचिव के पद की पात्रता समाप्त होने पर भी कार्य परिषद की बैठक में सचिव के तौर पर दो बार शामिल हुए है।

आपको बता दें कि कुलसचिव पद पर आंनद शंकर बहादुर को विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर राज्य शासन ने भेजा था। वे असिसटेंट प्रोफेसर के रुप में 60 वर्ष के बाद राज्य शासन में ही कार्य कर सकते हैं, विश्वविद्यालय में नहीं। साथ ही किसी की सेवानिवृति है तो सेवानिवृति के आदेश के अभाव में भी व्यक्ति को स्वंय अपना कार्यालय छोड़ देना होता है एवं इसकी सूचना संस्थान को देना होता है। जो शासकीय सेवा संबंधी मूलभूत नियम है। कुलसचिव विश्वविद्यालय में स्थापना और प्रशासन का दायित्व देख रहे थे। जिसके चलते उन्होंने अपने सेवानिवृति प्रावधानों को प्रशासन से छिपाया और नियमों का घोर उल्लंघन किया। साथ ही नियम के विरूद्ध आदेश की व्याख्या मनमाने ढंग से करते रहे। अब आगे देखना होगा कि इस मामले पर विश्वविद्यालय प्रबंधन और उच्च शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करती है।

नियुक्ति को लेकर पहले भी हुआ है विवाद
9 मार्च 2019 को कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मानसिंह परमार ने इस्तीफा दे दिया था। डॉ. परमार के इस्तीफा के बाद प्रभार कुलसचिव आनंद शंकर बहादुर सिंह को सौपा गया है। कुलसचिव ने कुछ दिन विश्वविद्यालय का संचालन किया, लेकिन स्थिति बिगड़ी यह देखकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रायपुर आयुक्त जीआर चुरेंद्र को कमान दी थी। जिसके बाद 3 मार्च 2022 को प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा को कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया।