दिनेश यदु@ रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चैत्र नवरात्रि पर सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ का तांता तगा हुआ है। पुरानी बस्ती स्थित माँ महामाया मंदिर में पहला ज्योति कलश जिसे माई जोत कहते है, आज भी चकमक पत्थर की चिंगारी से ही प्रज्जवलित किया जाता है। सिद्ध पीठ मां महामाया मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। इस मंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी के आसपास कराया गया था। हैहयवंशी राजाओं की कुलदेवी मां महामाया हैं. मंदिर पूरी तरह तांत्रिक विधि से निर्माण कराया गया है। प्राचीन काल से यहाँ परंपरा चली आ रही है, चैत्र व कुंवार नवरात्रि में चकमक पत्थर की चिंगारी छोटी कन्या के हाथों नवरात्र की माई ज्योत प्रज्ज्वलित कराई जाती है।