रायपुर. राजधानी रायपुर समेत छत्तीसगढ़ में बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों के बीच इन दिनों जीवनरक्षक Remdesivir Injection को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी मची हुई है। लोग इसके लिए कोई भी कीमत देने को तैयार हैं फिर भी नहीं मिल रहा है।
यहां तक कि कोविड और नॉन कोविड में लगे डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक इंजेक्शन के लिए नेता-मंत्री तक से सिफारिश लगानी पड़ रही है। आंबेडकर अस्पताल में रेडक्रॉस के सामने एक इंजेक्शन के लिए सुबह से लोगों की लाइन देखी जा सकती है।
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स्वास्थ्य विभाग के पास लोगों की शिकायत पहुंच रही थी कि मरीज के भर्ती होते ही कुछ अस्पताल संचालक रेमडेसिविर की मांग कर रहे हैं। ए-सिम्टोमेटिक मरीजों को भी रेमडेसिविर लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को राजधानी के आधा दर्जन बड़े निजी अस्पताल में जाकर जांच-पड़ताल किया तो संचालकों ने बताया कि मरीज के परिजन खुद इंजेक्शन लगाने का आग्रह करते हैं और कहीं से खोजकर रेमडेसिविर लाते हैं। मना करने के बाद भी वह इंजेक्शन लगवाते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों को इसकी जरूरत थी।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोगों के मन में भ्रम पैदा हो गया है कि रेमडेसिविर लगवाने से कोरोना मरीज ठीक हो जाएगा। ए सिम्टोमेटिक और मॉडरेट मरीजों को इंजेक्शन की कोई जरूरत नही होती है। गंभीर मरीज को ही रेमडेसिविर से रिकवर होने में मदद मिलती है। बिना जरूरत कोई भी इंजेक्शन लगाया जाए तो उसका दुष्प्रभाव होने से इनकार नही किया जा सकता है।
रायपुर सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल का कहना है, निजी अस्पतालों में बुधवार को जांच के लिए टीम पहुंची थी, जो जारी रहेगी। संचालकों ने बताया है कि मरीज के परिजन खुद रेमडेसिविर लगाने का आग्रह करते हैं और कही से खरीदकर लाते हैं। सभी अस्पतालों के निरीक्षण के बाद रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए गए हैं।