
महिला आयोग की सुुनवाई में पुरूष लगा रहे गुहार, बनाया जाए हमारे लिए भी पुरुष आयोग
रायपुर। महिला आयोग में अब सुनवाई के दौरान आने वाले पुरुष, आयोग के सदस्यों से पुरुष आयोग के लिए गुहार लगा रहे है। कुछ इसी तरह का वाक्या पिछले दिनों हुई सुनवाई के दौरान देखने और सुनने मिला। महिला आयोग में सुनवाई के दौरान पीडि़त महिलाओं के पति कहते है कि महिलाओं की बात सुनने के लिए आयोग है तो हमारे लिए भी आयोग होना चाहिए। इस पर महिला आयोग की सदस्य खिलेश्वरी किरण कहती है कि पुरुषों की इस मांग को हम शासन तक पहुंचाएगे।
आयोग की सदस्य ने बताया हम तो संतुलित निर्णय ही देते है हम सभी की सुनते है, लेकिन कई मामलों में हमें भी महसूस होता है कि महिलाएं पुरुषों को गलत साबित कर रही है तो उस स्थिति में हम महिलाओं को सही सलाह देते है। साथ ही हमारी कोशिश रहती है कि पति-पत्नी में तालमेल बैठ जाए।
रायपुर के ही 2सौ से अधिक मामले
राज्य महिला आयोग में रायपुर के ही 200 से अधिक मामले इस बार सुनवाई में रखे गए, जिसमें केवल 30 ही मामलों में सुनवाई हुई और इन मामलों में पुरुषों ने यहीं गुहार लगाई कि हमारे लिए भी आयोग खोला दिया जाए, क्योंकि महिलाएं तो अपनी पीड़ा यहा सुनाने आ जाती है लेकिन हम कहां जाए। हमारी तो कोई सुनने वाला भी नहीं है।
ऐसा ही एक रोचक मामला आयोग में आया था, जिसमें रायपुर की रहने वाली रेखा(बदला नाम) ने आयोग में आवेदन लगाया था कि मेरा पति मेरी बात नहीं मानता है, मैं कैसे इसके साथ रहूं? मेरी भी तो कोई सुनने वाला होना चाहिए , मैं परेशान हो गई हूं। जब रेखा के पति से पूछा गया तो उसके पति ने कहा कि ऐसा नहीं है। मेरी बूढ़ी मां छोटी बहन की जिम्मेदारी भी मेरे ऊपर है उन लोगों को प्राथमिकता देना मेरा फर्ज है। उसी तरह पत्नी को भी प्राथमिकता देता हंू। बताइऐ मेरा क्या कसूर है? मैडम हम अपनी पीड़ा कहा कहे हमारे लिए भी आयोग होना चाहिए जहां हम अपनी बात को रख सके। इसी तरह कई मामलों में पुरुषों ने पुरुष आयोग की बात को ही दोहराया।
फैक्ट फाइल
दिसंबर में आयोग में दर्ज मामले- 362
घरेलू हिंसा - 183
दहेज प्रताडऩा- 49
संपत्ति विवाद- 22
टोनही प्रताडऩा- 4
हत्या-9
कार्यस्थल पर यौन प्रताडऩा- 2
कार्यस्थल पर प्रताडऩा- 5
हम तो संतुलित निर्णय देते है, परिवार बचा रहे
हम दोनो पक्षों की जानकारी लेते है और हमारी कोशिश होती है कि सहीं निर्णय ही दे लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कुछ मामलों में पुरुष निर्दोष होते है, लेकिन महिलाएं उन पर झूठे इल्जाम लगाती है। ऐसी परिस्थितियों में हम संतुलित निर्णय देते है।
खिलेश्वरी किरण, सदस्य राद्य महिला आयोग
काउंसलिंग बराबर हो रही है, चार दिन रखी थी सुनवाई
महिला आयोग में कई पुरुषों के भी आवेदन आते है जिसमें वे लिखते है कि मेरी पत्नी से मुझे बचा लो लेकिन आयोग तो महिलाओं के लिए ही बना है इस कारण हम पुरुषों के आवेदन र²ी टोकरी में डाल देते है, क्योंकि उनके लिए कोई प्रावधान नहीं है।
अभय देवांगन, प्रभारी सचिव राज्य महिला आयोग
Published on:
02 Feb 2020 08:12 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
