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मोबाइल और गैजेट्स से बचपन हो रहा मिर्गी का शिकार, जानें कैसे

दो से छह साल तक के बच्चों में मिर्गी तेजी से बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले बच्चों में ऐसे बच्चों की संख्या सर्वाधिक है।

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मोबाइल और गैजेट्स से बचपन हो रहा मिर्गी का शिकार, जानें कैसे

मोबाइल और गैजेट्स से बचपन हो रहा मिर्गी का शिकार, जानें कैसे

रायपुर. मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बड़ों से ज्यादा बच्चों को बीमार कर रहे हैं। एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में मिर्गीग्रस्त बच्चों की संख्या में वृद्धि को देख डॉक्टरों ने इसकी मुख्य वजह मोबाइल फोन को माना है। 2017 में 74 बच्चे मिर्गी पीडि़त पहुंचे थे, वहीं फरवरी 2020 में यह संख्या बढक़र 1432 तक पहुंच गई है। ये आंकड़ा तो सिर्फ जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का है।

सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के तहत हर जिले में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेशन सेंटर खोला गया है। इन सेंटरों में कई बीमारियों से ग्रस्त बच्चों का इलाज किया जाता है। जिस बीमारी का यहां पर इलाज संभव नहीं हैं, उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। यूपी में दो मेडिकल कॉलेजों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें पूर्वांचल में केजीएमयू लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एएमयू का जेएन मेडिकल कॉलेज शामिल है। इसके लिए बजट भी जारी किया गया है।

2017 से अब तक आए पीडि़त
वर्ष संख्या
2017 -74
2018 -547
2019 -692
2020 (फरवरी तक)- 119

ये हैं मिर्गी के लक्षण
हाथ-पैर में जकडऩ व कंपन, आंखों का ठहर जाना, बातचीत न कर पाना, मुंह में लार या झाग निकलना, एक हाथ या पैर अकडऩा या टेढ़ा हो जाना।

बच्चे के अचानक दौरा पडऩे पर क्या करें-
- घबराएं नहीं, मरीज के सिर को सहारा देना।
- गले में बंधी कोई भी चीज को खोल देना।
- बच्चे को एक तरफ करवट दें।
- बच्चे के मुंह में कुछ न रखें।
- बच्चे को उलट-पुलट न करें।
- बच्चे को इमरजेंसी स्प्रे दें।
- होश न आ रहा हो तो एम्बुलेंस को फोन करें।
- नजदीकी चिकित्सक को दिखाएं।

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ऐसे करें जांच
सबसे पहले बच्चे को विशेषज्ञ के पास ले जाएं। यह पता होना जरूरी है कि मिर्गी है या नहीं। बच्चे की एमआरआई, ईसीजी व खून की जांच के बाद दवा शुरू की जाती है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
दवा रोज समय से लें। एक भी खुराक न छोड़ें। पानी बराबर पीते रहें। आधे घंटे में उल्टी होने पर दवा की खुराक दोहराएं। उपयोग करने से पहले बोतल को हिलाएं। खाना समय से खाएं। खाली पेट न रहें। पूरी नींद लें। भीड़भाड़, तेज आवाज में संगीत या ज्यादा शोर वाली जगह से बचें। मोबाइल फोन या टेलीविजन का उपयोग कम से कम करें।

सावधानियां बरतें
-साइकिलिंग और तैराकी अभिभावक की देखरेख में ही करें।
-स्कूली यात्रा में जाने पर समय से दवा लें।
-अच्छी नींद लें।
-जरूरत पडऩे पर प्राथमिक चिकित्सा लें।
-बच्चें की बीमारी छिपाए नहीं। बच्चे का
-आत्मविश्वास बढ़ाते रहें।

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बीमारी
-मोबाइल और टीवी के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की पूरी नहीं हो पा रही नींद
-आंखों पर बार-बार पडऩे वाली लाइट से बढ़ रहे मिर्गी से पीडि़त बच्चे
-एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में हर माह पहुंच रहे 50 से 100 बच्चे

नोट
बच्चों में मिर्गी तेजी से बढ़ रही है। इसकी मुख्य वजह बच्चों का ज्यादा मोबाइल फोन व टीवी का इस्तेमाल करना है। आंखों पर बार-बार पडऩे वाली लाइट से भी मासूम मिर्गी की जद में फंस रहे हैं। ऐसे बच्चों की नींद तक पूरी नहीं हो पाती है। अभिभावक जागरूक होंगे तभी स्थिति में सुधार हो सकेगा।
-प्रो. उमजा फिरदौस, कार्यक्रम प्रभारी, मेडिकल कॉलेज, एएमयू।

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