
Watermelon Day: ऑफ सीजन में तरबूज की बंपर पैदावार कर हैरत में डाला, किसान ने अपना ये तरकीब
ताबीर हुसैन@रायपुर. कहते हैं नो रिस्क नो गेम। जब तक आप कुछ नया नहीं करेंगे, भीड़ से हटकर नजर नहीं आएंगे। किसानी (Chhattisgarh farmer) में इनोवेशन बहुत कम ही होता है लेकिन राजधानी से 60 किमी दूर सिमगा के किसान अनुज अग्रवाल ने ऑफ सीजन में कलिंदर की खेती कर सभी को हैरत में डाल दिया है। 3 एकड़ में कलिंदर लगाए और अब तक 25 टन की बिक्री हो चुकी है। 10 टन और निकलने की उम्मीद है। 3 अगस्त को तरबूज दिवस (National Watermelon Day) है। इस मौके पर हम आपको अनुज के एक्सपेरिमंट का किस्सा साझा कर रहे हैं।
अनुज ने बताया कि वे हॉर्टिकल्चर में बीएससी करने के बाद पिता शंकरलाल अग्रवाल से इंस्पायर हुए और खेती करने लगे। वे हमेशा कुछ नया करना चाहते थे लेकिन रिस्क लेने में डरते थे। इस बार हिम्मत की और ऑफ सीजन में कलिंदर लगाया। 15 मई को रोपाई की। कई बार मन में संशय के बादल घुमड़ते थे कि यह काम हो पाएगा या नहीं, लेकिन बड़े-बुजुर्गो का आशीर्वाद था कि फसल ठीक हुई।
अनुज ने बताया कि इस मौसम में कलिंदर लगाने के लिए फल को सहारे की जरूरत होती है साथ ही बारिश से भी बचाना होता है। मैंने 30 माइक्रान की पॉलिथिन का उपयोग किया। माकेर्टिंग सबसे बड़ा चैलेंज- अनुज ने बताया कि यह खेती मेरे लिए एक रिस्क थी क्योंकि खेती तो चैलेंजिंग थी ही इसकी मार्केटिंग भी चुनौती से कम नहीं। 25 टन की बिक्री 2 लाख रुपए में हुई है।
शास्त्री मार्केट के होलसेल व्यापारी शिव भाई तरबूज वाले ने बताया कि राजधानी में राजिम, संबलपुर और शिवरीनारायण से आवक होती है। वैराइटियों में किरण, किरण-टू, ब्लैक मेजिक और नामधारी हैं जो ज्यादा चलन में है। ऑफ सीजन में नागपुर से भी आवक होती है। यहां किरण और ब्लैक मैजिक की डिमांड ज्यादा है।
अनुज ने बताया कि यह खेती मेरे लिए एक रिस्क था क्योंकि खेती तो चैलेंजिंग थी ही इसकी मार्केटिंग भी चुनौती से कम नहीं। 25 टन की ब्रिकी 2 लाख रुपए में हुई है। इस बार की फसल से अंदाजा हो गया कि अगली बार बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है।
Published on:
03 Aug 2019 05:00 pm
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