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Street Dog Terror: आवारा श्वानों का खूंखार रूप, काट-नोच रहे लोगो को, कर रहे घातक हमले

Street Dog Terror: राजधानी में आवारा श्वानों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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Street Dog Terror: आवारा श्वानों का खूंखार रूप, काट-नोच रहे लोगो को, कर रहे घातक हमले

Street Dog Terror: आवारा श्वानों का खूंखार रूप, काट-नोच रहे लोगो को, कर रहे घातक हमले

रायपुर। Street Dog Terror: राजधानी में आवारा श्वानों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सप्ताहभर पहले आवारा श्वानों ने कोटा में मासूम को नोंचा। अब नेहरू मेडिकल कॉलेज के एचओडी डॉ. अरविंद नेरल पर हमला बोला है। हमला ऐसा कि डॉक्टर सहम गए हैं। श्वान ने उनके पैरों को लहूलुहान कर दिया। लगातार हमले के बाद भी नगर निगम प्रशासन सो रहा है। जब आवारा श्वानों ने मासूम को काटा तो दावा किया कि रोज नसबंदी की जा रही है।

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कार से उतरकर दो-तीन कदम चला ही था कि श्वान ने आकर काट दिया

नेहरू मेडिकल कॉलेज से ड्यूटी कर साढ़े 5 से पौने छह बजे के आसपास पैथोलॉजी लैब जा रहा था। कार पार्क कर ज्यों ही कटोरा तालाब में एक नर्सिंग होम के पास दो-तीन कदम चला ही था कि एक श्वान आया और बाएं पैर को काट दिया। कुछ समझ पाता, इससे पहले ही श्वान ने पैर में गहरा जख्म कर दिया। दाएं पैर से छुड़ाने की कोशिश करने लगा तो इस पैर को श्वान ने मजबूती से पकड़ लिया। इसमें भी गहरा जख्म हो गया। दोनों पैर से खून बहने लगा। किसी तरह चोटग्रस्त पैर से जोर से लात मारा तो श्वान भाग गया। ये सामान्य श्वान नहीं था, रैबीज वाला हो सकता है। क्योंकि सामान्य श्वान ऐसे ही अचानक नहीं काटता। वह भौंकते हुए आता है और काटता है।

इससे कम से कम संभलने का मौका तो मिलता है। शहर में इतने श्वान हो गए हैं कि जिसकी गिनती नहीं है। 64 साल की उम्र में किसी श्वान ने काटा है तो फेमिली मेंबर घबरा गए हैं। एंटी रैबीज वैक्सीन का डोज लिया हूं। नगर निगम वाले आवारा श्वानों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करते। अगर करते तो ऐसी नौबत नहीं आती। आए दिन किसी न किसी इलाके में ये आवारा श्वान नुकसान पहुंचाते हैं। हाल ही में गुलमोहर कॉलोनी कोटा में एक मासूम को नोच डाला। इसके बाद भी निगम की कार्रवाई ढाक के तीन पात की तरह है। राजधावासियों से अपील है कि वे आवारा श्वानों से बचकर चलें। कब किस पर हमला कर दे, कहा नहीं जा सकता। इसलिए अलर्ट रहना जरूरी है। निगम प्रशासन भी आवारा श्वानों पर सख्त कार्रवाई करे। सोमवार को कलेक्टर व निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर कार्रवाई की गुजारिश करूंगा।

- जैसा कि नेहरू मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी के एचओडी डॉ. अरविंद नेरल ने बताया

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यही नहीं, आवारा श्वानों को पकड़ने के लिए रोज अभियान चलाया जा रहा है। निगम का यह दावा झूठा है, क्योंकि किसी भी मोहल्ले में डॉग कैचर की टीम नहीं दिखती। आवारा श्वानों पहले की तरह घूम रहे हैं। पैदल व बाइक पर जाने वालों पर गुर्रा रहे हैं और मौका मिलते ही काट भी रहे हैं।

आवारा श्वानों का आतंक इतना है कि अब कुछ मोहल्ले, खासकर गुलमोहर सोसाइटी के लोग अब घबराने लगे हैं। मासूम को इसी इलाके में आवारा श्वानों ने हमला किया था। केवल गुलमोहर सोसाइटी नहीं रोहिणीपुरम, गुढ़ियारी, समता कॉलोनी, टिकरापारा, राजेंद्र नगर, कटोरा तालाब में आवारा श्वानों का आतंक है। मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टर पर कटोरा तालाब में ही श्वान ने हमला किया।

प्रदेश के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल में रोजाना 18 से 20 लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाया जा रहा है। ये तो केवल इसी अस्पताल के आंकड़े हैं। कई लोग निजी अस्पतालों में जाकर डोज लगा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार रोजाना 50 से ज्यादा लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इसमें आधे से ज्यादा पहले डोज वाले होते हैं।

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आइसोलेशन वार्ड, मरीज आते हैं तब बनाते हैं
आंबेडकर अस्पताल में हाल ही में डॉग बाइट के गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। पागल श्वानों के काटने के बाद जिन लोगों में इसके लक्षण दिखते हैं, ऐसे ही मरीजों को भर्ती करने की जरूरत होती है। इस बीमारी को हाइड्रोफोबिया कहा जाता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति पानी से डरता है। श्वानों की तरह पानी को पीने के बजाय चाटता है। दर्द से तड़पता है और श्वानों की तरह भौंकने भी लगता है।

ऐसे मरीज की बीमारी अति संक्रमित होती है। यानी साथ में कोई रहे तो वह भी संक्रमित हो सकता है। इस कारण ऐसे मरीजों को एक कमरे में रखकर इलाज किया जाता है। पेइंग वार्ड की ओर सबसे ऊपर वाले कमरे में आइसोलेशन वार्ड बनाने का दावा अस्पताल प्रबंधन करता है। बाकी समय यह पेइंग वार्ड रहता है। यानी सामान्य मरीज, जिन्हें पेइंग वार्ड की जरूरत होती है, उन्हें दिया जाता है।