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किसानों को बड़ी सौगात, सरकार ने लॉन्च किया धान बिक्री के लिए एप्लीकेशन

Token Tunhar Hath: किसानों को धान बेचने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा. अब घर बैठे ही ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकते हैं. इसके लिए एनआईसी ने 'टोकन तुंहार हाथ' मोबाइल एप भी लॉन्च किया है.

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Paddy procurement in Chhattisgarh: देश के ज्यादातर राज्यों में एमएसपी पर धान की खरीद जारी है. हरियाणा में करीब 52 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है. वहीं अब छत्तीसगढ़ में भी 1 नवंबर से एसएसपी पर धान खरीदा जाएगा. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान (Paddy on MSP) बेचने के लिए किसानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है. हाल ही में छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है. अब किसानों को धान बेचने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा, बल्कि घर बैठे ही टोकन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं. इस प्रोसेस को आसान बनाने के लिए एनआईसी ने 'टोकन तुंहर हाथ' मोबाइल एप्लीकेशन (Token Tunhar Hath Mobile App) लॉन्च किया है.

धान-मक्का खरीद के लिए टोकन अनिवार्य
छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान और मक्का बेचने वाले किसानों के लिए टोकन की खरीद अनिवार्य कर दी गई है. इसके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों ही सुविधाएं दी जाएंगी, लेकिन भीड़-भाड़ कम करने के लिए किसानों को घर बैठे ऑनलाइन टोकन (Online Token) के लिए भी जागरूक किया जा रहा है. ये फैसला पिछले साल घटी दुर्घटनाओं के मद्देनजर लिया गया है, जिसमें टोकन की लाइनों में भगदड़ के कारण कई किसानों को चोटें आईं थीं. अब 'किसान टोकन तुंहार' हाथ मोबाइल एप डाउनलोड करने और टोकन की सुविधा मददगार साबित होगी. इस तरह लंबी कतारों और दुर्घटनाओं से राहत मिलेगी.

इस मोबाइल एप पर मंडी समिति को किसानों की ओर से दर्ज पंजीकृत रकबा, बांक खाता, टोकन और धान की खरीद जैसे जानकारियां मिल जाएंगी.
ये टोकन अगले 7 दिनों तक समिति उपार्जन और उपार्जन केंद्रों से प्राप्त कर सकते हैं.
यहां किसान रोजाना 30 प्रतिशत तक की सीमा के लिए ऑनलाइन टोकन ले पाएंगे और 70 प्रतिशत ऑनलाइन उपलब्ध होंगे.
छोटे, बड़े और सीमांत किसानों को पंजीकृत संख्या के हिसाब से समान अवसर मिलेंगे.

1.37 किसानों ने करवाया पंजीकरण
इस साल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 7,000 किसानों ने पंजीकरण करवाया है. वहीं पिछले साल को मिलाकर कुल 1 लाख 37 किसान रजिस्टर हो चुके हैं. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 1.30 लाख किसान खरीद केंद्रों में पहुंचेंगे.


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