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पेज चार की बाटम- हरित भविष्य की पटरियों पर आत्मनिर्भर भारत की नई इबारत

रतलाम

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Newsdesk

Jul 24, 2026

datia news

datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

फोटो-आरटी- 2401- डॉ लोकेन्द्र सिंह कोट


रतलाम। भारतीय रेलवे की 173 वर्षों से अधिक लंबी यात्रा में 17 जुलाई का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी। भाप इंजन से प्रारंभ हुई भारतीय रेल की यात्रा डीजल, बिजली और अब हाइड्रोजन ऊर्जा तक पहुंच गई है। इसलिए यह केवल एक नई रेलगाड़ी का शुभारंभ नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और तकनीकी आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक है।

जींद से चली यह ट्रेन देश को यह संदेश देती है कि आने वाले समय में विकास की गति केवल तेज नहीं, बल्कि स्वच्छ, संतुलित और प्रकृति के अनुकूल भी होगी। इसकी चिमनी से काला धुआं नहीं निकलेगा; इसके संचालन की प्रक्रिया में मुख्यतः जल और जलवाष्प उप-उत्पाद के रूप में निकलेंगे।



कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन?
सामान्य डीजल ट्रेन में इंजन के भीतर डीजल जलाकर ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म प्रदूषक कण निकलते हैं। इसके विपरीत हाइड्रोजन ट्रेन में फ्यूल सेल प्रणाली होती है। ट्रेन में सुरक्षित टैंकों में संग्रहित हाइड्रोजन को फ्यूल सेल तक पहुँचाया जाता है। फ्यूल सेल में हाइड्रोजन की वायुमंडल से प्राप्त ऑक्सीजन के साथ विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया होती है। इस अभिक्रिया से बिजली बनती है। यही बिजली ट्रेन की मोटरों को चलाती है। अतिरिक्त ऊर्जा बैटरियों में संचित की जा सकती है, जिसका उपयोग ट्रेन को गति देने या अधिक शक्ति की आवश्यकता के समय किया जाता है।



रोजगार की नई संभावनाएं



भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़ी मात्रा में आयातित कच्चे तेल और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भर रहा है। हाइड्रोजन तकनीक का विस्तार इस निर्भरता को कम करने में सहायक हो सकता है। देश में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल संसाधनों की विशाल क्षमता है। इनके माध्यम से हरित हाइड्रोजन तैयार कर परिवहन और उद्योगों में प्रयोग किया जा सकता है।

हाइड्रोजन रेल परियोजना से फ्यूल सेल निर्माण, इलेक्ट्रोलाइजर, उच्च-दाब टैंक, सेंसर, बैटरी, सुरक्षा प्रणाली, रखरखाव और अनुसंधान के क्षेत्रों में नए उद्योग तथा रोजगार विकसित होंगे। इस तरह यह ट्रेन केवल यात्रियों को एक शहर से दूसरे शहर तक नहीं पहुँचाएगी, बल्कि भारत को नई हरित अर्थव्यवस्था की ओर भी ले जाएगी।


चुनौतियां भी कम नहीं

हाइड्रोजन ट्रेन भविष्य का आकर्षक विकल्प अवश्य है, लेकिन इसकी राह पूरी तरह सरल नहीं है। वर्तमान में हरित हाइड्रोजन उत्पादन की लागत अधिक है। इसके भंडारण के लिए उच्च दबाव वाले विशेष टैंकों और अलग ईंधन भराव केंद्रों की आवश्यकता होती है। फ्यूल सेल और संबंधित उपकरण भी पारंपरिक डीजल प्रणाली की तुलना में महंगे हो सकते हैं। हाइड्रोजन कितना पर्यावरण-अनुकूल है, यह उसके उत्पादन के स्रोत पर निर्भर करता है। यदि हाइड्रोजन को कोयला या प्राकृतिक गैस आधारित ऊर्जा से बनाया जाता है, तो संपूर्ण जीवन-चक्र में कार्बन उत्सर्जन बना रह सकता है। इसलिए इस परियोजना की वास्तविक सफलता नवीकरणीय ऊर्जा से बने हरित हाइड्रोजन की लगातार उपलब्धता, उचित लागत और सुरक्षित आपूर्ति पर निर्भर करेगी।