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गांधी जी के दौरे से पहले यहां बांटे गए थे पर्चे, भीड़ देख शाम 7 बजे तक देते रह गए थे भाषण

अपने दौरे के दौरान गांधी जी ने सागर शहर में कीर्तन मंदिर की रखी नींव

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सागर

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Muneshwar Kumar

Sep 30, 2019

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सागर/ मध्यप्रदेश में गांधी ऐसे तो आजादी से पहले कई बार आए। सातवीं बार जब उनका आगमन में मध्यप्रदेश में हुआ तो वह सागर आए थे। यहां गांधी जी ने सभा भी की थी। 2 अक्टूबर 2019 को गांधी जी की 150वीं जयंती है। इस अवसर पर हम #Gandhi@150 सीरीज के तहत गांधी जी मध्यप्रदेश दौरे की कहानी बता रहे हैं। इस सीरीज में हम आपको सागर दौरे की कहानी बता रहे हैं। #GandhiMeomries

आजादी से पहले सन् 1933 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सागर आगमन हुआ था। यहां 2 दिसंबर को तिलकगंज के पास उनकी आमसभा हुई थी। जिसमें हजारों लोगों ने उनकी आमसभा को सुना था। इसके बाद जब वो यहां से निकल रहे थे तो संत कबीर वार्ड में 3 दिसंबर 1933 को उन्होंने कीर्तन मंदिर की आधारशिला रखी थी। मंदिर की आधारशिला चांदी की कन्नी से रखी गई थी। खास बात यह है कि आज भी कीर्तन मंदिर में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यह ऐसा मंदिर है जहां ध्वजारोहण होता है। यह साल शाक्य कोरी समाज के लोगों द्वारा विविध आयोजनों के माध्यम से महात्मा गांधी को याद किया जाता है।

बांटे गए थे पोस्टर
वहीं, जानकार बताते हैं कि महात्मा गांधी दांड़ी यात्रा के दौरान सागर आए थे। यहां उनकी यात्रा से संबधित पोस्टर छापे गए थे। वे पहले शहर नजदीक अनंतपुरा में रूके थे। यहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया था। उसके बाद 2 दिसंबर को शाम 4 बजे सागर पहुंचे। यहां तिलकगंज स्टेशन के पास उनकी आमसभा हुई । शाम 7 बजे तक यह सभा चली थी। दूसरे दिन कीर्तन मंदिर की आधारशिला रखी गई।

चरखे से वस्त्र निर्माण का काम
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबूलाल उस्ताद ने यहां पर चरखा से वस्त्र बनाने का काम शुरू किया। उन्हें यह प्रेरणा महात्मा गांधी से मिली। हालांकि उनका निधन हो जाने के बाद यह काम वहीं रुक गया। आसपास के लोगों का कहना है कि बाबूलाल उस्ताद में लोन लेकर यहां मशीनें लगाई थी। उनके ना रहने के बाद जिन से लोन लिया था वह मशीन लेकर यहां से चले गए। हालांकि अब यहां कुछ नहीं है।







मंदिर की नींव रखी
मंदिर के पास रहने वाले चंद्रेश कुमार सकवार ने बताया कि 1933 में गांधी जी का आगमन सागर की ओर हुआ था और जब यहां से गुजर रहे थे तो उन्होंने देखा यह हरिजन बस्ती है। हरिजनों को बढ़ावा देने के लिए वह अंदर आए और कीर्तन मंदिर की आधारशिला रखी। कीर्तन मंदिर के बाहर आज भी यह लिखा हुआ है, साथ ही यहां पर गांधी जी की एक मूर्ति भी है।