
फाइल फोटो
बीना. नगर पालिका अध्यक्ष ने पीआइसी (प्रिसीडंट इन काउंसिल) का पुर्नगठन 11 अप्रेल को किया था, जिसमें नियमों का पालन न करने का आरोप लगाते हुए पीआइसी भंग करने की मांग की गई है।
उपाध्यक्ष रमाकांत बिलगैंया के साथ पार्षदों ने कलेक्टर से बुधवार को शिकायत की है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि नगर पालिका अध्यक्ष ने पहले 11 अप्रेल को बनाई थी और सीएमओ के पत्र के बाद फिर से 16 अप्रेल को पीआइसी बनाई गई थी। इसके बाद सीएमओ ने नगर पालिका अधिनियम की 1961 की धारा 70 के तहत नहीं बनाए जाने का पत्र जारी किया था, जिसमें पीआइसी सदस्यों में एक सदस्य अनुसूचित जाति/जनजाति का सदस्य होना अनिवार्य है, जिसे शामिल नहीं किया गया है। इसकी शिकायत कलेक्टर से की है। इसके बाद संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन ने सीएमओ को पत्र लिखकर नियमानुसार पीआइसी बनाने की कार्रवाई के निर्देश दिए। उपाध्यक्ष ने बताया कि अध्यक्ष द्वारा सीएमओ पर दबाव डालकर बैठक का एजेंडा जारी करने के लिए आदेशित किया जा रहा था। उपाध्यक्ष और पार्षदों ने शिकायत कर मांग की है कि नपाध्यक्ष द्वारा जानबूझकर बार-बार नगर पालिका अधिनियम को नजरअंदाज कर कार्य करने के कारण पद से अयोग्य घोषित किया जाए।
पीआइसी संशोधित करने लिखा पत्र
पीआइसी का जो गठन हुआ है, उसमें नियमानुसार एक पार्षद एससी वर्ग से होना था। इस संबंध में जेडी से भी मार्गदर्शन लिया था और उन्होंने भी एक सदस्य इस वर्ग से शामिल करने के लिए कहा। इस संबंध में अध्यक्ष को पत्र जारी कर पीआइसी का संशोधित आदेश जारी करने का उल्लेख किया है।
आरपी जगनेरिया, सीएमओ, बीना
पीआइसी और समिति का किया था गठन
16 अप्रेल को पीआइसी और सलाहकार समिति का गठन किया था, जिसकी सूचना सीएमओ ने सदस्यों को दी थी। साथ ही कलेक्टर को प्रतिलिपि भेजी थी। बैठक के एजेंडा जारी करने पर सीएमओ ने जो पत्र संयुक्त संचालक को लिखा था, उसपर संयुक्त संचालक ने पत्र लिखा था कि बैठक अध्यक्ष द्वारा गठित अध्यक्षीय परिषद के मार्गदर्शन में कर सकते हैं।
लता सकवार, अध्यक्ष, नगर पालिका, बीना
Published on:
24 Apr 2025 12:41 pm

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