
Rajghat Water meter Drop account Rajghat 1000 liters of water for Rs 7
सागर. राजघाट फेज-२ में नगर निगम प्रशासन ७.२४ रुपए की लागत से १००० लीटर स्वच्छ पानी की जलापूर्ति शहर में करेगा। ३५० करोड़ की लागत से राजघाट फेज-२ के तहत पूरे शहर में पेयजल नेटवर्क और परियोजना के उन्नयन का कार्य किया जाना है। फेज-२ की स्वीकृत हो चुकी डीपीआर के मुताबिक शहरवासियों को चौबीस घंटे सातों दिन पेयजल की सप्लाई की जाएगी। वर्तमान में एक अनुमान के मुताबिक ७.२४ रुपए की राशि में लगभग १०४२ लीटर पानी शहर को जलापूर्ति किया जा रहा है लेकिन पानी की स्वच्छता पर जरा भी काम नहीं किया जा रहा है।
शहर को राजघाट से प्रतिदिन ६० एमएलडी यानि करीब ६ करोड़ लीटर पानी की सप्लाई की जाती है। निगम प्रशासन वर्तमान में परियोजना पर लगभग सवा करोड़ रुपए की राशि खर्च कर रहा है, जिसमें हुडको के लोन की किश्त भी शामिल है। इस हिसाब से निगम प्रशासन १ रुपए में लगभग १४४ लीटर पानी शहर को सप्लाई करता है। विशेषज्ञों की माने तो निगम प्रशासन यदि परियोजना पर गंभीर रहता तो शहर को आज स्वच्छ पानी मिल रहा होता।
निगम ने ही कबाड़ बना दी परियोजना
विशेषज्ञों की मानें तो राजघाट को निगम के जलप्रदाय विभाग ने बर्वाद किया है। ऑपरेशन व मेंटेनेंस की जिम्मेदारी यदि पीएचई को दी गई होती तो बांध की स्थिति दयनीय नहीं होती और न ही लोगों को दूषित व मटमैला पानी पीना पड़ता।
परियोजना एक नजर
२०१८ से राजघाट परियोजना के ऑपरेशन व मैंटेनेंस पर १४.२४ करोड़ रुपए की राशि प्रति वर्ष खर्च की जाएगी।
३२ करोड़ रुपए के करीब नगर लोन लेना होगा, जिसे ६० किश्तों में चुकाना होगा।
३५०० अति गरीब व २५५०० गरीब परिवार बताए गए हैं सागर शहर में
मटमैले पानी का पता लगाने में नगर निगम प्रशासन नाकाम
सागर. बीते एक सप्ताह से राजघाट से मटमैला व दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है लेकिन नगर निगम अब तक इस बात की जानकारी नहीं जुटा पाया है कि पानी मटमैला कैसे आ रहा है। मंगलवार को अफसरों के पास कई क्षेत्रों से शिकायतें पहुंची। निगमायुक्त अनुराग वर्मा ने कुछ स्थानों से पानी के सैम्पल लेने के निर्देश भी दिए लेकिन निगमकर्मी फॉल्ट पकडऩे में अब तक सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं। सिविल लाइन निवासी अरविंद सिंह, गोपालगंज निवासी शिवा पटेल का कहना है कि राजघाट का पानी पीने से परिजन पेट की बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। इसके बाद उन्होंने हैंडपंप का पानी पीना शुरू किया है।
ये हो सकती हैं वो दो वजह
बांध के जानकार बताते हैं कि बांध में जब जलस्तर कम होने लगता है तो पानी के रंग में हल्का सा परिवर्तन आ जाता है। हालांकि यह स्थिति तब निर्मित होती है जब बांध का जलस्तर ५०८ मीटर के नीचे पहुंचता है या फिर सबसे कम गहराई पर बिछी पाइपलाइन से पानी खींचा जाता है। नलों से दूषित पानी निकलने का दूसरा बड़ा कारण नए लीकेज हो सकते हैं। अधिकारी भी इस बात से सहमत हैं। उनका कहना है कि पूरे शहर में मटमैला पानी नहीं आ रहा है। जिन वार्डों में ओवरहेड टैंक से जलापूर्ति होती है वहां एेसी समस्या कम देखने को मिली है। हालांकि जलप्रदाय विभाग अब तक एक भी नया लीकेज चिन्हित नहीं कर पाया है।
Published on:
04 Apr 2018 02:25 pm

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