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भाग्योदय तीर्थ में आयोजित धर्मसभा
सागर. भाग्योदय तीर्थ में आयोजित धर्मसभा बुधवार को निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज ने कहा कि जैनियों के के अष्ट मूलगुण होते हैं। उन्होंने कहा कि मद्य, मधु, मांस का त्याग , पांच उदुम्बर फल का त्याग, जिन दर्शन, जल छानकर पीना और रात्रि भोजन का त्याग जीवदया ये जैन श्रावक के मूलगुण है। ये धर्म नहीं ये तो कुल का आचार है। इन्हें न पालन करने वाला तो पापी है और जो आचार्य विद्यासागर गुरुदेव को आहार देने के बाद रात में खा रहा है उससे बड़ा महापापी कौन होगा। मुनि ने कहा कि रात्रि भोजन त्याग करने का नियम में आपको नहीं दे रहा हूं, लेकिन आपको अब स्वत: ही नियम लेना है। मुनि ने कहा कि बुराइयां किसी सड़क चलते हुए से नहीं आती। बुराइयां प्रकट हो जाती है और हमारी जिंदगी अंधेरे से इतनी भर जाती है कि हमें सूझता ही नहीं कि प्रकाश भी कोई चीज है। एक छोटी सी कला हमें सीखना है। एक छोटी सी माचिस की काड़ी जलाना है और अंधेरा अपने आप भाग जाएगा। उन्होंने कहा कि मयूर की आवाज से सांप थर थर कांप जाते है, इसलिए पाप को ज्यादा बड़ा मत समझो। अंधकार से भयभीत मत हो कि रातभर का अंधकार है। हमने जिंदगी भर पाप किए है, मात्र एक दीपक जलाना सीख लो क्योंकि निगोद से लेकर नरकों तक व्यक्ति ने पाप ही पाप किए हैं। राग द्वेष मिथ्या इसके अलावा क्या किया। कई बार लोग कहते हैं कि हमारा बहुत लंबा चौड़ा घाटा है, पूरी जिंदगी भी कमाई करे तो भी पूरा नहीं होगा। मत घबराओ, भली जिंदगी भर का घाटा है, एक क्षण में थोड़ा सा पुण्य चेत जाएगा और आकाश से रत्नों की वृष्टि हो जाएगी। महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक पडग़ाहान कर आहार कराने सौभाग्य प्रमोद जैन वारदाना परिवार को प्राप्त हुआ है।
Published on:
08 Aug 2024 12:22 pm
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