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पंजाब के 13000 स्वास्थ्य कर्मी 29 अप्रैल से हड़ताल पर, सरकार लगी मनाने में

-मामूली तनख्वाह पर काम कर रहे हैं करोना से लड़ने वाले योद्धा -कोई स्वास्थ्य बीमा नहीं, वेतन दोगुना करने की मांग उठी मंत्री की अपील- हड़ताल न करें, मांगों पर विचार किया जा रहा

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Health workers

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चंडीगढ़। पंजाब के 13000 स्वास्थ्य कर्मियों ने 29 अप्रैल को अनिश्चितकालीन समय के लिए हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। हड़ताल पर जाने वालों में राष्ट्रीय देहात मिशन के अधीन आने वाले यूनानी, आयुर्वेदिक, पैरामेडिकल स्टाफ समेत वह स्टाफ भी शामिल है जो 12 साल से विभाग में कम तनख्वाह पर काम कर रहा है।

किसी का बीमा नहीं किया

एनआरएचएम एंप्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. इंद्रजीत सिंह राणा ने चंडीगढ़ में मीटिंग करते हुए पंजाब के सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू को अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की दोगली नीति के खिलाफ सभी डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ 29 अप्रैल को अनिश्चितकालीन धरने पर जाने की तैयारी कर रहा है। हैरानी वाली बात है कि हम सरकार के सभी प्रोजेक्ट को जमीनी स्तर पर कार्यरत करते हैं, पर हमारे अपने ही कर्मचारियों का बीमा नहीं किया गया। अब तक हमारे एनएचएम कर्मचारी ब्लू कॉर्नर में काम कर रहे हैं। देश के बहुत सारे एनएचएम डॉक्टर कोरोना की बलि चढ़ चुके हैं। पंजाब में भी 13000 स्वास्थ्य कर्मचारी सीधे तौर पर कोरोना के संपर्क में काम कर रहे हैं। हम किसी भी स्तर पर किसी से कम काम नहीं कर रहे हैं।

वेतन दोगुना किया जाए

उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य कर्मचारी मामूली तनख्वाह पर काम कर रहे हैं। अब जब उन्हें नियमित करने का समय आया तो सरकार आंखें दिखा रही है। राजस्थान व हरियाणा की सरकार ने इस तरह काम कर रहे सभी कर्मचारियों को नियमित कर दिया है तो हमारी सरकार पीछे क्यों हट रही है। हमारी मांग है कि सभी एनएचएम कर्मचारियों की तनख्वाह दुगनी की जाए। इन सभी का इंश्योरेंस किया जाए, ताकि करोना जैसी खतरनाक बीमारी का डटकर मुकाबला कर सकें। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गई तो हम 29 तारीख से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ जाएंगे।

मंत्री ने कहा- हड़ताल पर न जाएं

इस बीच पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा ने ग्रामीण डिसपेंसरी में काम कर रहे फार्मासिस्टों को उनकी माँगों मानने का भरोसा देते हुए अपील की है कि वे इस संकट की घड़ी में हड़ताल पर न जाएँ। बाजवा ने फार्मासिस्ट यूनियन के प्रतिनिधिमंडल को टेलीफ़ोन करके भरोसा दिलाया कि सरकार की तरफ से उनकी नौकरियाँ रेगुलर करने की माँग पर हमदर्दी पूर्वक विचार किया जा रहा है और उनको उम्मीद है कि कुछ कानूनी और अदालती फ़ैसलों की अड़चनों को दूर करके इस मामले का हल निकाल लिया जायेगा। उन्होंने यूनियन के प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया कि फार्मासिस्टों का कंट्रैक्ट रिन्यू और इस महीने का वेतन जारी करने के लिए विभाग को हिदायतें जारी कर दी गई हैं। उन्होंने यूनियन के प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि वह स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग की तरह इन फार्मासिस्टों को भी 50 लाख रुपए के बीमे की सुविधा देने का मामला भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे।