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सीकर में कभी लगान के लिए चलती थी गोलियां, आज ये बन इनकी गले की फांस

उस दौर में यह राशि अधिक होने के कारण किसान लगान जमा कराने से कतराते थे। एेसे में कई बार प्रशासन को कुर्की की कार्रवाई भी पडऩी जाती थी। लेकिन अब पूरे प्रदेश में एेसा नहीं है।

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firing for lagan in sikar

कभी लगान वसूली के विरोध से आंदोलन के जरिए प्रदेश को दहला देने वाले किसान और राज के रिश्ते अब समय के साथ बदल गए हैं। क्योंकि तीन हजार से अधिक किसानों से लगान वसूल करना पटवारियों को ज्यादा महंगा पड़ जाता है। इसलिए 'राज' खुद चुपके से एेसे किसानों का लगान जमा करा देता है।


जिलेभर में 50 लाख से अधिक व सीकर उपखंड में हर वर्ष पांच लाख रुपए जमा होता है। इसमें से ज्यादातर लगान खुद पटवारी जमा कराते हैं। सीकर उपखंड में 26 व जिलेभर में 338 पटवार मंडलों से वसूली होती है। एक्एपर्ट का कहना है कि वर्ष 1980 के बाद लगान की दर नहीं बढ़ी है। उस दौर में यह राशि अधिक होने के कारण किसान लगान जमा कराने से कतराते थे। एेसे में कई बार प्रशासन को कुर्की की कार्रवाई भी पडऩी जाती थी। लेकिन अब पूरे प्रदेश में एेसा नहीं है।

10 से 31 रुपए हेक्टेयर तक लगान


जिले में चाही व जाब की तीन-तीन श्रेणी बनाकर प्रशासन लगान वसूली करता है। चाही श्रेणी में 31, 23 व 20 रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगान लिया जाता है। जबकि जाब में 15.50, 11.50 व 10 रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगान लिया जाता है।


इनसे लिया जाता है लगान


प्रदेश में छोटे काश्तकारों से लगान पूरी तरह माफ है। छोटे किसानों में असिचिंत भूमि वाले किसान और एक हेक्टेयर से कम जमीन वाले आते हैं। जिन किसानों के पास एक हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है उनसे प्रतिवर्ष लगान की वसूली होती है। सीकर जिले में लगान के लिहाज से भी जमीन को दो श्रेणियों में बांटा हुआ है।


और यह भी वसूली का तरीका


कई पटवारियों ने जेब से जमा होने वाले लगान को वसूलने का दूसरा तरीका भी निकाल रखा है। कई पटवारी एक बार तो खुद अपनी जेब से लगान जमा करा देते हैं और रसीद अपने पास रख लेते हैं। वर्षभर में जैसे-जैसे किसान उनके पास किसी काम से आते हैं तो वह उनको लगान जमा कराने की रसीद दिखाकर किसान से पैसे ले लेते हैं।


आखिर पटवारी क्यों जमा कराते लगान


जिले के ज्यादातर किसानों का लगान 30 से 100 रुपए के बीच बनता है। जिले में गांवों से ज्यादा ढाणियां हैं। यदि पटवारी एक ढाणी में वसूली के लिए तीन-चार बार भी चला गया तो उनका लगान से ज्यादा खर्चा हो जाता है।

इसलिए पटवारी अपने सर्किल का एक साथ लगान राजकोष में जमा करा देते हैं। पटवारियों का कहना है कि हर वर्ष शत-प्रतिशत लगना जमा कराना जरूरी है, नहीं तो विभागीय कार्रवाई हो जाती है। इसलिए मजबूरन कई किसानों का लगान जेब से लगाना जमा कराना पड़ता है।

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