CORONA Side Effects : समुद्रों को जहरीला बना रहे मास्क, दस्ताने और पीपीई किट

-जलीय जीवों के लिए खतरा बने हमारे सुरक्षा संसाधन

By: pushpesh

Published: 21 Jun 2020, 03:06 PM IST

कोविड-19 ने पर्यावरण पर कई अप्रत्याशित प्रभाव डाले हैं। दुनियाभर में करोड़ों मास्क, हैंड सैनिटाइजर की खाली बोतल, दस्ताने और दूसरे कोरोनावायरस निरोधी सामग्री इस्तेमाल की जाती है। सही ढंग से इनका निस्तारण नहीं हो पा रहा और नतीजा समुद्र के प्रदूषण में बेतहाशा इजाफा हो रहा है। ये हर दिन समुद्र के पारिस्थितिक तंत्र को बिगाड़ रही हैं।

हाल ही समुद्रों को साफ करने वाले फ्रांसिसी अभियान ‘ऑपरेशन मेर प्रोपर’ ने समुद्र के बढ़ते प्रदूषण के सबूत के तौर पर ऐसी कुछ विचलित करने वाली तस्वीरें और वीडियो जारी किया है, जो चिंताजनक हैं। अभियान के प्रमख लॉरेंट लोम्बार्ड ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, समुद्र में जेलीफिश से ज्यादा मास्क तैर रहे हैं। इससे पहले फरवरी में प्रशांत महासागरीय क्षेत्रों में प्लास्टिक के बढ़ते प्रदूषण पर ध्यान दिलाया था। हांगकांग के तट पर सोको द्वीप पर बड़ी संख्या में मास्क पाए गए।

चिंता इसलिए
-150 मिलियन टन समुद्री कचरे में पहले ही 80 लाख टन प्लास्टिक हर वर्ष समुद्रों में पहुंच रहा है।
-66 हजार टन कचरा अतिरिक्त अपशिष्ट और 57 हजार टन प्लास्टिक कचरे का उत्पादन होगा एक वर्ष में यदि हर ब्रिटिश प्रतिदिन सिंगल यूज मास्क इस्तेमाल करता है

कोविड-19 पर्यावरण के लिए खतरा कैसे
सिंगल यूज प्लास्टिक कचरा ही नहीं कार्बन उत्सर्जन भी पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है। जिसमें लॉकडाउन के दौरान गिरावट देखी गई। ऐसा वाहन और औद्योगिक इकाइयों का बंद रहने से हुआ। चिंता इस बात की है कि महामारी पर्यावरण के खतरे से सरकारों का ध्यान हटा रही है। नवंबर 2020 में संयुक्त राष्ट्र में होने वाला जलवायु सम्मेलन पहले ही टाल दिया गया है। कई अमरीकी शहरों में रिसाइक्लिंग के कार्यक्रम रोक दिए गए हैं। जबकि वायरस से प्रभावित स्पेन, इटली में भी रिसाइक्लिंग को रोका गया है। इसके अलावा महामारी के दौरान मेडिकल वेस्ट और फूड पैकेजिंग वेस्ट भी बढ़ा है। इसके सडऩे से ग्रीनहाउस गैस में वृद्धि हो रही है।

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