
नई दिल्ली। विश्वस्तर पर अपने देश का नाम रोशन के लिए कड़ी मेहनत, लगन और जुनून की जरूरत होती है। कई ऐसे खिलाड़ी पहले भी हो चुके हैं और फिलहाल भी हैं जो गरीब में जन्में लेकिन अपना खून, पसीना एक करके बुलंदियों तक पहुंचे हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला खिलाड़ी से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिनके पास कभी जूते खरीदने तक के पैसे नहीं और अब वह टोक्यो ओलंपिक में भारत का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं। दरअसल, हम बात करें तमिलनाडु में जन्मीं रेवती वीरामनी (Revathi Veeramani) की। जो गरीब घर में जन्मीं हैं लेकिन अब टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने जा रही हैं।
बचपन में ही उठ गया था रेवती के सिर से माता-पिता का साया
रेवती वीरामनी जब 7 वर्ष की थी तो उनके माता-पिता चल बसे थे। तमिलनाडु में जन्मीं रेवती और उनकी बहन को उनकी नानी ने ही पाल पोष कर बड़ा किया है। उन्होंने मजदूरी करके इन दोनों लड़कियों को पाला है।
कभी जूते खरीदने के नहीं थे पैसे
गरीबी का आलम यह था कि कभी रेवती के पास प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे। कई बार वो नंगे पैर ही दौड़ी हैं। जब उनके कोच कानन ने उनका ये टैलेंट देखा तो वो हैरान रह गए और उनकी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने रेवती को जूते दिलवाने से लेकर स्कूल की फीस जमा कराने तक मदद की।
नानी को सुनने पड़ते थे ताने
रेवती को दौड़ने भेजने के लिए रेवती की नानी को समाज से काफी ताने सुनने पड़ते थे। लेकिन उन्होंने किसी की भी प्रवाह नहीं की और रेवती को दौड़ में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। रेवती के दोस्तों ने भी उनकी काफी आर्थिक मदद की।
संघर्ष के बाद मिली सरकारी नौकरी
कई वर्षों तक संघर्ष करने के बाद रेवती को दक्षिणी रेवले में सरकारी नौकरी मिल गई। रेवती ने 400 मीटर की दौड़ 53.55 सेकेंड में पूरी की। और वो चार गुणा 400 मीटर मिश्रित रिले टोक्यो ओलंपिक के लिए सेलेक्ट हो गई। 23 वर्षीय रेवती ट्रायल देने आई महिला धावकों में से सबसे तेज दौड़ रही थी।
Updated on:
10 Jul 2021, 11:47 PM IST
Published on:
10 Jul 2021, 11:43 PM IST
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