मुनि पुंगव सुधासागर संघ के मंगल पावन सानिध्य में श्रावक संस्कार शिविर में धार्मिक आयोजनों की बह रही भक्ति की गंगा

मुनि पुंगव सुधासागर संघ के मंगल पावन सानिध्य में श्रावक संस्कार शिविर में धार्मिक आयोजनों की बह रही भक्ति की गंगा

Pawan Kumar Sharma | Publish: Sep, 16 2018 04:32:23 PM (IST) Tonk, Rajasthan, India

मुनि पुंगव सुधासागर संघ के मंगल पावन सानिध्य में आयोजित चातुर्मास में सुदर्शनोदय तीर्थ में 14 से 23 सितम्बर तक श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

 

आवां. मुनि पुंगव सुधासागर, मुनि महासागर, मुनि निष्कंप सागर, क्षुल्लक धैर्य सागर व क्षुल्लक गम्भीर सागर के पावन सानिध्य मे सुदर्शनोदय तीर्थ पर श्रावक संस्कार शिविर के धार्मिक आयोजनों में भक्ति की गंगा बह रही है।

 

सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति आवां के संयोजक संजय छाबड़ा, श्रवण कोठारी, अशोक जैन, कौशल जैन और कमलेश जैन ने बताया कि मुनि संघ के मंगल चातुर्मास मे सुदर्शनोदय तीर्थ में 14 से 23 सितम्बर तक श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविरार्थियों का आवां के साथ टोंक, देवली, दूनी में आहार होने तथा सिरोही मे ठहरने की व्यवस्था होने से इन स्थानों पर भी धर्म का प्रादुर्भाव हो रहा है।

 

विनय मोक्ष का द्वार है- मुनि सुधासागर
अहंकार नर्क का मार्ग है तो विनय मोक्ष का द्वार है। इन्सान को विनयशीलता और उत्तम क्षमा धर्म की बारीकियां समझनी चाहिए। मुनि सुधासागर ने संस्कार शिविर के दूसरे दिन निश्चय धर्म को अपनाने की राह दिखाई। मुनि ने साधन और साध्य का अन्तर स्पष्ट करते हुए कहा कि क्रियाएं धर्म नहीं, धर्म प्राप्त करने का मार्ग है। विनय मोक्ष नहीं, मोक्ष का द्वार है।


निकृष्ट मान और उत्तम क्षमा की परतें खोलते हुए निश्चय धर्म से अहंकार शमन के उपाय बताए। निश्चय के स्वरूप का बखान करते हुए मुनि ने कहा कि इसके प्रकट होने से समदृष्टि के भाव पैदा होते है। ऊंच-नीच, अमीर- निर्धन, ज्ञानी और अज्ञानी का भेद समाप्त हो जाता है। मुनि ने निश्चय को जीवन का सार मानते हुए कहा कि क्रिया मे व्यवहार हो वहीं दृष्टि में निश्चय होना चाहिए।

 

टोंक. आदिनाथ मंदिर पुरानी टोंक में सुबह भगवान आदिनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। समाज के प्रवक्ता राजेश अरिहंत ने बताया कि उत्तम मार्दव धर्म की पूजा के तहत श्रीजी को 21 अघ्र्य सहित श्रीफल चढ़ाए गए। मंदिर में उषा कोठारी, इंदिरा, संजू, मंजू, तारा देवी आदि ने उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की।

 

अनिल भोंसा ने बताया कि शाम को आदिनाथ मंदिर में क्षीरसागर से जल लाकर भगवान आदिनाथ का चांदी के कलशों से वार्षिक कलशाभिषेक किया गया। इस दौरान भानु, नवल, मनीष, जीतू, पदम, निर्मल, सुनील, अशोक, विनोद आदि मौजूद थे।

 

इधर, दिगम्बर जैन नसिया अमीरगंज में चिन्मयानंद के सान्निध्य में उत्तम मार्धव धर्म की विशेष पूजा अर्चना की गई। जिन धर्म प्रभावना समिति के सदस्य पवन कंटान ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के तहत आज शांतिधारा, नित्य अभिषेक, नित्य नियन पूजा की गई। विकास अत्तार ने बताया कि शाम को मंगल आरती, प्रश्नमंच, स्वाध्याय प्रमोद शास्त्री के शास्त्र पठन, सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।

 

इसमें जैन क्रिकेट प्रतियोगिता हुई। भागचन्द जैन ने बताया कि शांतिनाथ दिगम्बर जैन आवां में चल रहे मुनि पुंगव सुधा सागर के ससंघ सान्निध्य मे चल रहे धार्मिक संस्कार शिविर के तहत टोंक में 1200 शिवार्थी की प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था की गई है।

 


मालपुरा. ग्राम लावा में श्रीमुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में चल रहे पर्युषण पर्व के तहत श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की। वहीं श्रीअग्रवाल सेवा सदन पाण्डुक शिला में पं. अंकित शास्त्री के सान्निध्य में उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की गई।

 


मार्दव धर्म की महिमा बताते हुए पं. अंकित शास्त्री ने कहा कि लोगों को हमेशा अपने जीवन में विनम्रता अपनानी चाहिए। आदिनाथ जैन मंदिर, पाण्डुक शिला स्थित शंातिनाथ मंदिर, अग्रवाल मंदिर बृजलालनगर, मंदिर चौधरियान, मंदिर तेरापंथियान, मंदिर टोडान, डिग्गी, टोरडी, पचेवर सहित कई मंदिरों में सुबह जिनेन्द्र भगवान का जिनाभिषेक, शांतिधारा कर दस लक्षण पर्व के अन्तर्गत उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की गई।

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