video: सस्ती दर पर सोना बेचने के नाम पर जिले से बाहर के लोगों को अपने जाल में फंसाने वाले ठगो को पुलिस ने किया गिरफ्तार

video: सस्ती दर पर सोना बेचने के नाम पर जिले से बाहर के लोगों को अपने जाल में फंसाने वाले ठगो को पुलिस ने किया गिरफ्तार

Pawan Kumar Sharma | Publish: Oct, 07 2017 10:06:40 AM (IST) Gulzar Bagh, Tonk, Rajasthan, India

सस्ती दर पर सोने बेचने के नाम पर क्षेत्र के पोल्याड़ा व चांदली गांव में वर्षों से ठगी की वारदातें की जा रही है

देवली.

क्षेत्र के चांदली गांव में सस्ती दर पर सोने के सिक्के देने के नाम पर ठगी करने के दो आरोपित शुक्रवार को देवली पुलिस के हत्थे चढ़ गए। एसआई हरलाल मीना ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित हंसराज व कमल कंजर निवासी चांदली है। दोनों सगे भाई हंै।

 

वारदात के बाद आरोपित घर छोडकऱ चांदली के जंगल में भाग गए थे। उल्लेखनीय है कि गत बुधवार को शातिर ठग कमल व हंसराज कंजर ने हनुमानगढ़ निवासी हरिप्रीत सिंह को सस्ते दर पर सोने के सिक्के देने के बहाने झांसा देते हुए 1.20 लाख रुपए की ठगी की थी।

 

 

बाहरी को बनाते हैं शिकार
सस्ती दर पर सोने बेचने के नाम पर क्षेत्र के पोल्याड़ा व चांदली गांव में वर्षों से ठगी की वारदातें की जा रही है। इन गांवों के आरोपित मुख्यत: जिले के बाहरी लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। इससे वे वारदात को सरलता से अंजाम देते हैं। अन्यत्र का होने से वारदात के बाद पीडि़त भी अपना बचाव कर निकलने में ही भलाई समझता है।

 

 

ऐसे में अब तक दर्जनों लोगों के साथ इस प्रकार की वारदातें हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि बुधवार को क्षेत्र के शातिर ठग कमल व हंसराज कंजर ने हनुमानगढ़ निवासी व हरिप्रीत सिंह को सस्ते दर पर सोने के सिक्के देने के बहाने शिकार बनाते हुए 1.20 लाख रुपए की ठगी की थी। इससे पहले आरोपितों ने हरिप्रीत को दोस्ती के जाल में फंसाया था।

 

 

आरोपितों के हौंसलों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वारदात के बाद वे पीडि़त को रोडवेज बस स्टैण्ड देवली तक छोडऩे आए। अब तक हुई वारदातों के अंाकड़ों पर नजर डाले तो सभी वारदातें टोंक जिले के बाहर रहने वाले लोगों के साथ हुई। दरअसल इनके द्वारा की जाने वाली सभी वारदातें एक ही प्रकार से की जाती है।

 

इसमें सोना अथवा चांदी सस्ती दर पर देने के नाम पर सौदा किया जाता है। इसी बीच आरोपितों में से कुछ लोग फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर आते हैं। ऐसे में पीडि़त घबरा जाता है तथा जैसे-तैसे समझौता करने के लिए तैयार हो जाता है।

 

 

कई बार देखा जाता है कि ठगी की वारदात के बाद पीडि़त सामाजिक प्रतिष्ठा के नुकसान के भय से पुलिस में रिपोर्ट नहीं देते। इसी के चलते आरोपितों के हौंसले बुलन्द हो रहे है। इधर, कई मर्तबा हुई वारदातों के बावजूद पुलिस इन पर अंकुश लगाने में नाकाम रही है।

 

 

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