video : उदयपुर में बर्ड फेस्टिवल का आगाज, पिछोला झील में बर्ड वाचिंग

Mukesh Hingar | Publish: Dec, 23 2017 04:09:54 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

- उदयपुर में शनिवार को बर्ड फेस्टिवल का आगाज गृहमंत्री कटारिया ने किया

 

उदयपुर . झीलों की नगरी उदयपुर में शनिवार को बर्ड फेस्टिवल का आगाज हुआ। फेस्टिवल के शुभारंभ समारोह में आए छात्र-छात्राओं ने पिछोला झील से बर्ड को निहारते हुए अपनी जिज्ञासाएं जानी और बर्ड को अपने कैमरे में कैद किया। फेस्टिवल का शुभारंभ गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने किया।


कालका माता स्थित जंगल सफारी-गोल्डन पार्क में हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूल के बच्चे, कॉलेज के विद्यार्थी और पक्षीविद ने भाग लेंगे। अतिथियों ने जोर दिया कि पक्षियों और वेटलैंड के संरक्षण के लिए सरकार अपने प्रयास कर रही है लेकिन जन जागरूकता के लिए भी बड़ा काम करना होगा और बर्ड फेयर जैसे आयोजन से जरूर जन-जन तक बर्ड की सुरक्षा का संदेश जाएगा। कार्यक्रम स्थल पर ऑन स्पॉट फोटोग्राफी कॉम्पीटिशन, बर्डिंग, स्पॉट पेंटिंग एवं क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। स्वागत सीसीएफ राहुल भटनागर ने किया।

उप मुख्य वन संरक्षक हरिणी वी. ने बताया कि तीन दिवसीय फेयर में 24 दिसंबर को मेनार, बड़वई, किशन करेरी, मंगलवाड़, नागावली एवं जवाई बांध आदि जलाशयों पर बर्ड वाचिंग का कार्यक्रम होगा तथा 25 दिसंबर को सुबह 9.30 बजे होटल लेण्डमार्क में विषय विशेषज्ञों के अनुभव साझा करने के साथ ही समापन समारोह होगा।

 

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दिखे कई दुर्लभ व संकटग्रस्त पक्षी

लेकसिटी में शुक्रवार को हुई बर्ड रेस (बर्ड हंट) को लेकर जलाशयों पर पक्षियों के आवास और कई दुर्लभ व संकटग्रस्त पक्षी दिखे। बर्ड रेस के लिए बनी पक्षी प्रेमियों की छह टीमों ने पक्षियों का विश्लेषण करते हुए सूचीबद्ध किया। शाम को टीमें लौटी तो निर्णायकों ने परिणाम घोषित किए। किंग वल्चर टीम विजेता रही, जिसने सर्वाधिक 170 प्रजातियां देखी। इधर, शनिवार को बर्ड फेयर का आगाज होगा। पक्षी प्रेमी सुबह टीमों के साथ उदयपुर से 40 किलोमीटर दूर बर्ड देखने निकले। टीमों ने कई जलाशयों का निरीक्षण किया। स्थानीय प्रवासी पैसेज माइग्रेंट पक्षी और कुछ दुर्लभ पक्षी भी दिखे। समारोह के मुख्य अतिथि अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डॉ. जी. वी. रेड्डी थे। निर्णायक बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के पूर्व निदेशक डॉ. असद आर रहमानी, रजत भार्गव और डॉ. सतीश कुमार शर्मा थे। मुख्य वन संरक्षक अक्षय सिंह, राहुल भटनागर, वन संरक्षक आई पी एस मथारू, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी विक्रम सिंह चौहान, उप वन संरक्षक ओपी शर्मा, सोहैल मजबूर, कर्नाटक के प्रकृतिविद् गोपी सुंदर मौजूद थे।

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