आपदाओं में उजड़ते रहे धरतीपुत्रों के घर, सरकार लगाती रही चंद सिक्कों का मरहम

आपदाओं की आगोश में बना रहा राजस्थान

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर. आपदाओं में धरतीपुत्रों के घर उजड़ते रहे, तो सरकार उन किसानों के दर्द पर चंद सिक्कों का मरहम लगाती रही। वर्ष 2014 से 2019 तक की बात की जाए तो एक भी वर्ष ऐसा नहीं निकला जब किसी किसान को प्रकृति की मार नहीं झकझोरा हो। तूफान व प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों के मकानों के नुकसान खूब होते रहे, तो इनमें से चयनित कुछ किसानों को सरकार ने जरूर राहत की खनक सुनाई।

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जिलेवार हाल- 2014- 19

जिला- तूफान व आपदा से मकानों का नुकसान- नुकसान की राशि लाखों में- मिली राशि (लाखों में)

उदयपुर- 13443-431.81-431.86

अजमेर- 32- 1.22- 1.22

अलवर- 757-579.74-62.93

बांसवाड़ा- 830- 91.78-62.74

बारां- 3848- 106.48- 106.48

बाड़मेर- 2135- 2551.19-197.50

भरतपुर- 788-49.97-65.34

भीलवाड़ा- 6323- 402.00-221.26

बीकानेर- 396-361.00-101.41

बूंदी- 81-2.76-2.76

चित्तौडगढ़़- 1631-63.97-63.97

चूरू- 394-411.33-50.41

दौसा- 1935-344.90-103.53

धौलपुर- 1621-61.82-61.82

डूंगरपुर- 2-0.50-0.05

जयपुर- 58-11.60-11.60

जालोर- 85747-4315.36-4315.35

झालावाड़- 1431-96.29-46.07

झुंझुनूं- 118-28.13-10.65

जोधपुर- 1315-97.51- 91.55

कोटा- 3883-147.44-87.78

नागौर- 8- 2.85-1.01

पाली- 6094-320.50-320.50

प्रतापगढ़- 69-12.32-12.32

राजसमन्द- 1319-90.72-55.71

सीकर- 457-12.24-12.24

सिरोही- 2317-357.75-176.74

श्री गंगानगर- 10573-396.61-382.76

टोंक- 17-1.18-0.00

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कई जिले ऐसे, जो मांगा वहीं नहीं मिला इनमें से अलवर, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, चूरू, दौसा, झालावाड़, झुंझुनंू, कोटा, राजसमन्द, सिरोही और टोंक ऐसे जिले थे, जिन्होंने किसानों के मकानों को हुए नुकसान की एवज में जो राशि मांगी वह उन्हें नहीं मिली। सरकार की ओर से विभिन्न वर्षों में समय-समय पर किए गए अंकेक्षण में या तो राशि कम कर दी या किसानों को इसका पात्र नहीं माना गया। साढ़े पांच हजार किसानों की राशि रोकीकुल 1 लाख 47 हजार 195 किसानों की रिपोर्ट वर्ष 2014 से 19 के बीच विभिन्न जिलों से राज्य सरकार को भेजी गई थी, इसकी एवज में सरकार ने 1 लाख 41 हजार 789 को ही भरपाई राशि र्दी, जबकि सरकार ने निरीक्षण रिपोर्ट को जांचते हुए साढ़े पांच हजार किसानों की राशि रोक ली, यानी उन्हें पात्र नहीं माना गया।

bhuvanesh pandya Reporting
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