
रुद्रेश शर्मा
Udaipur News : अमरीका, यूरोप और गल्फ देशों में राजस्थान का स्टोन शान बढ़ा रहा है। विदेशों में उदयपुर के ग्रीन मार्बल, राजसमंद के ग्रेनाइट, बिजौलिया के सेंड स्टोन की खास मांग है। वहीं मकराना, किशनगढ़ का मार्बल भी विदेशियों की पसंद बना हुआ है।
सऊदी अरब की गल्फ ऑयल कम्पनी के कॉर्पोरेट ऑफिस सहित कई प्रमुख इमारतों और मस्जिदों में उदयपुर का ग्रीन मार्बल लगा है तो इटली में बड़े पैमाने पर भवनों में बिजौलिया का सेंड स्टोन खूबसूरती बढ़ा रहा है। राजसमंद के ग्रेनाइट, मकराना और किशनगढ़ के मार्बल की अमरीका, यूरोप एवं गल्फ कंट्रीज में इतनी डिमांड है कि उदयपुर एक्सपोर्ट मंडी से अलग-अलग वैरायटी का करीब सौ कंटेनर पत्थर रोजाना एक्सपोर्ट हो रहा है। इसकी अनुमानित कीमत छह करोड़ रुपए प्रतिदिन है। वहीं अब वाया उदयपुर विदेशी पत्थर का भी इम्पोर्ट होने लगा है।
पिछले कुछ दशकों में उदयपुर के ग्रीन मार्बल से शुरू हुआ पत्थर का निर्यात अब बड़ा रूप ले चुका है। ग्रीन मार्बल सहित अन्य किस्मों के पत्थरों की डिमांड बढ़ने से उदयपुर देश का बड़ा स्टोन एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट हब बन चुका है। संभाग में बड़ी संख्या में मार्बल खदानें और प्रोसेसिंग यूनिट्स होने और गुजरात का कांडला बंदरगाह नजदीक होने से यह कॉरिडोर का रूप ले चुका है। इसके रास्ते से पूरे प्रदेश का पत्थर विदेशों में पहुंच रहा है।
उदयपुर में विदेशों से भी पत्थर का इम्पोर्ट होने लगा है। इनमें इजिप्ट, ओमान, इटली, वियतनाम, टर्की, ब्राजील आदि देशों से अगल-अलग क्वालिटी का पत्थर आ रहा है। प्रदेश में बन रहे होटले, रिसोर्ट आदि में इनकी मांग है। करीब 30-40 हजार टन पत्थर का प्रतिमाह आयात हो रहा है।
एक्सपोर्ट होने वाले मार्बल और ग्रेनाइट की करीब सौ से अधिक रंगों की वैरायटी है। इनका निर्यात छोटी से लेकर बड़ी तक कई आकार की स्लैब में होता है। प्रोसेसिंग यूनिट्स में हर आकार में पत्थर को काटने वाली मशीनें हैं।
ग्रीन मार्बल
सेंड स्टोन
अरावली ऑनेक्स
क्वार्डज
गुजरात की खदानों का पत्थर भी उदयपुर की मार्बल प्रोसेसिंग यूनिट्स में पहुंच रहा है। यहां प्रोसेसिंग के बाद इसे एक्सपोर्ट किया जाता है। प्रदेश के जोधपुर व धौलपुर का पत्थर, देवगढ़ का ब्लैक ग्रेनाइट भी यहीं से विदेशों तक जा रहा है।
100 से अधिक प्रोसेसिंग यूनिट्स उदयपुर
100 कंटेनर के करीब रोजाना का एक्सपोर्ट
45 - 50 एक्सपोर्टर उयदयपुर में
उदयपुर से नब्बे के दशक में ग्रीन मार्बल का निर्यात विदेशों में होना शुरू हुआ था। इसके बाद यह धीरे-धीरे बढ़ता गया और पत्थर की अन्य किस्मों का भी निर्यात शुरू हो गया। अभी नेचुरल और आर्टिफिशियल मिलाकर लगभग 80 से सौ कंटेनर प्रतिदिन एक्सपोर्ट हो रहा है। कारोबार बढ़ा है, लेकिन कारोबारियों की कुछ परेशानियां भी बढ़ी है जिनका समाधान जरूरी है।
- हितेश पटेल, सचिव, उदयपुर मार्बल प्रोसेसर समिति
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Updated on:
30 May 2024 03:47 pm
Published on:
30 May 2024 02:53 pm
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