सरकार का मुफ्त किताबी फार्मूला फेल, अनुमान से बढ़ाई किताबे नहीं पड़ रही पार

नि:शुल्क किताबी गफलत - स्कूलों में बच्चों को दी जाती है नि:शुक्ल पुस्तकें

By: bhuvanesh pandya

Updated: 02 Mar 2020, 11:28 AM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली सरकारी नि:शुल्क पुस्तकों का फार्मूला ऐसा है जिससे बच्चों की किताबे पार नहीं पड़ रही। सरकार ने इसके लिए भले ही तय सिस्टम बना रखा है, लेकिन ये लेकुना कई वर्षों से चला आ रहा है, इस पर शिक्षक चर्चा करते हैं, अपनी समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचाते हैं, लेकिन इस समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। बीते वर्षों में कक्षाओं के रोल के अनुसार जो पुस्तकें बढ़ाई जाती रही हैं, वह बाद में आने वाले रोल के अनुरूप नहीं होती है। ऐसे में कई बार बच्चों से लेकर अभिभावक भी शिकायतें करते हैं। हर बार पुरानी कक्षा के बच्चों की संख्या का कुछ प्रतिशत बढ़ाकर किताबों की मांग की जाती है।

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शाला दर्पण पर अपलोड करनी होती है मांग नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों को लेने के लिए स्कूल अपनी लॉगइन आइडी से शाला दर्पण पर कितनी पुस्तकों की जरूरत है उसे अपलोड करती है, इसका तय सिस्टम बना हुआ है। अपलोड कर इसे लॉक करने के लिए शाला फ्री टेक्स बुक डिमांड पर जाकर इसे खोलना होता है। वर्तमान में जो रोल है उसमें से 10 प्रतिशत बढ़ाकर अपनी मांग रखनी होती है। इस बार पहली से पांचवी तक नई पुस्तकें आएंगी। तो दसवीं और बारहवीं कक्षा में पुरानी पुस्तकों को ही तय संख्या में दिया जाएगा।

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ये है नियम: - पहली से तीसरी तक 100 प्रतिशत नई पुस्तकें देने का प्रावधान है। जबकि अगले सत्र में पहली से पांचवीं तक और दसवीं व बारहवीं कक्षा में पुरानी पुस्तकें दी जा एगी। - 4 थी से 12 वीं कक्षा तक 50 प्रतिशत पुरानी और 50 प्रतिशत नई पुस्तके दी जाती हैं। अगले सत्र में चौथी से नौंवी व ग्यारहवीं में नई पुस्तकें दी जाएगी।

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इसलिए हो जाती गड़बड़: जो फार्मूला तय कर रखा है, इसके अनुसार पहली से बाहरवीं तक की मांग ऑनलाइन इन्द्राज करते समय ये देखना होता है कि जो कक्षा का तय रोल है, उसमें से 10 प्रतिशत बढ़ाकर अगले वर्ष के लिए पुस्तकों की मांग रखनी होती है, जबकि दस प्रतिशत के लिहाज से बेहद कम पुस्तकें ही बढ़ पाती हैं, ऐसे में जो नियम है उसके अनुसार भी छात्रों को मिल नहीं पाती है। शिक्षक नेता शेरसिंह चौहान ने बताया कि जो तय सिस्टम है उसके आधार पर नए सत्र के लिए जो किताबे हम मंगवा रहे हैं, इस सिस्टम से तो कई कक्षाओं के बच्चे नियमों में आने के बाद भी इन पुस्तकों से वंचित रहेंगे।

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ये बिन्दु महत्वपूर्ण - जो कक्षा है उससे पहले की कक्षा में जो बच्चे अध्ययनरत है, उन्हें उत्तीर्ण मानते हुए तय प्रतिशत के आधार पर यदि पुस्तकें मंगवाई जाती है, तो कम नहीं पडेंग़ी। - जिन बच्चों को नई पुस्तकें नहीं मिल पाती हैं, उनके मन में ये रहता है कि हमें पुरानी पुस्तकें क्यों दी जा रही है, ऐसे में कई बार उनके मन में हीन भावना सामने आती है।

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यह फार्मूला सरकार ने तय कर रखा है। जुलाई अगस्त में फिर से डिमांड मांगी जाएगी। यदि किसी स्कूल में बच्चों के लिए किताबें कम पड़ती है, तो नई मांग रखी जाएंगी। हालांकि इसमें सिस्टम है कि जो नि:शुल्क वितरित पुस्तकें हैं उन्हें बच्चों से मंगवाना है।

भरत जोशी, जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय्

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