5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सैकड़ों फीट खुदाई के बाद भी नहीं खुला कालभैरव के इस चमत्कारिक मंदिर का रहस्य

ये है कालभैरव का चमत्कारिक मंदिर, 'मां' को लगता है शराब का भोग

2 min read
Google source verification
patrika

ujjain news,ujjain latest news,Kalbhairav Mandir Ujjain

उज्जैन. मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में एक चमत्कारिक मंदिर का रहस्य वर्षों बाद भी बरकरार है। वर्षों पूर्व एक अधिकारी ने सैकड़ों फीट खुदाई कराई थी, ताकि रहस्य का पता चल सके, लेकिन इसका खुलासा न तब हो पाया था और न ही आज तक यह कोई जान पाया है कि आखिर जो मदिरा प्रतिमा पी रही है, वह जाती कहां है। कालभैरव के साथ-साथ चौबीस खंभा माता मंदिर में विराजित महालाया और महामाया, ये दो प्रतिमाएं भी नवरात्रि की अष्टमी पर शराब पीती हैं।

देश के इन मंदिरों का रहस्य भी है अनसुलझा
भारत में ऐसे अनेक मंदिर हैं जिनके रहस्य अनसुलझे हैं। जैसे करणी माता मंदिर, निधि वन मंदिर, तनोट माता मंदिर, ममलेश्वर महादेव मंदिर, भूतेश्वरनाथ शिवलिंग, अचलेश्वर महादेव मंदिर, ज्वालामुखी देवी आदि हैं। इसी कड़ी में महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित कालभैरव मंदिर भी आता है।

भैरव रोज पी जाते हैं कई लीटर शराब
कालभैरव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान की प्रतिमा साक्षात रूप में मदिरा पान करती है। काल भैरव को मदिरा प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है। जैसे ही शराब से भरे प्याले भैरव की मूर्ति के मुंह से लगाते हैं, तो देखते ही देखते वे खाली हो जाते हैं। दिनभर में यह प्रतिमा हजारों लीटर शराब पी जाती है, भक्तों द्वारा पिलाई जाने वाली शराब आखिर कहां जाती है, यह रहस्य किसी को नहीं पता।

शहर से 8 किमी दूर है मंदिर
कालभैरव मंदिर शहर से करीब 8 किमी दूर शिप्रा के तट पर स्थित है। यह लगभग छह हजार साल पुराना माना जाता है। यह तंत्र क्रिया और मंत्र सिद्धि के लिए प्रसिद्ध स्थान है। प्राचीन समय में यहां सिर्फ तांत्रिकों को ही आने की अनुमति थी। कालान्तर में आम लोगों के लिए खोल दिया गया। यहां जानवरों की बलि भी चढ़ाई जाती थी, अब यह प्रथा बंद कर दी गई है। अब भैरव को केवल मदिरा का भोग लगाया जाता है। यह सिलसिला कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ, यह कोई नहीं जानता।

झूले में विराजमान हैं भैरव
मंदिर में काल भैरव की मूर्ति के सामने झूला लगा है, जिसमें भैरव की मूर्ति विराजमान है। बाहरी दीवारों पर अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। सभागृह के उत्तर की ओर एक पाताल भैरवी नाम की एक छोटी सी गुफा भी है।

इन देवियों को कलेक्टर खुद पिलाते हैं शराब
नवरात्रि पर्व के दौरान अष्टमी तिथि पर कलेक्टर खुद देवियों को शराब पिलाते हैं। यह शासकीय पूजा कहलाती है, पहले यह पूजा तहसीलदार द्वारा की जाती थी। अब इस परंपरा का निर्वाह कलेक्टर स्वयं करते हैं। उज्जैन में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां माता को मदिरा पिलाई जाती है। इतना ही नहीं मंदिर आने वाले भक्तों को भी प्रसाद के रूप में शराब ही बांटी जाती है। महाअष्टमी के दिन लोक कल्याण के साथ सुख, समृद्धि के लिए चौबीस खंभा माता मंदिर में नगर पूजा का आयोजन किया जाता है।