
उज्जन. आगामी सिंहस्थ मेले और पर्यटन विकास को ध्यान में रखते हुए शिप्रा नदी में जल यात्री परिवहन सेवा शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। इस परियोजना के तहत नदी में लगभग 15 किलोमीटर लंबा वॉटर-वे विकसित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु और पर्यटक नाव और मिनी क्रूज के माध्यम से नदी किनारे स्थित प्रमुख मंदिरों तक पहुंच सकेंगे। इस सुविधा से धार्मिकपर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर संचालित करने की योजना है। इसे लेकर स्मार्ट सिटी कंपनी ने हाल ही में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित किए थे, जिसमें लगभग छह अनुभवी कंपनियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए हैं। ये कंपनियां बनारस, अहमदाबाद और गांधी सागर जैसे क्षेत्रों में नाव और क्रूज संचालन का अनुभव रखती हैं। कंपनियों द्वारा नदी की गहराई, चौड़ाई, घाटों की स्थिति और जल प्रवाह को ध्यान में रखते हुए संचालन के सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद जल्द ही टेंडर जारी किए जाने की संभावना है।
प्रस्ताव के अनुसार शिप्रा नदी में शनि मंदिर से कालियादेह महल तक नाव और मिनी क्रूज सेवा संचालित की जाएगी। यह वॉटर-वे लगभग 15 किलोमीटर लंबा होगा, जो कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने का कार्य करेगा। हालांकि इस मार्ग में कई स्टॉपडेम, पुल और पुलिया मौजूद हैं, इसलिए निर्बाध संचालन के लिए विशेषज्ञों से तकनीकी सुझाव लिए जा रहे हैं।
शिप्रा नदी में वॉटर-वे बनने से उज्जैन में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है। नाव और मिनी क्रूज सेवाओं से देश-विदेश के पर्यटक आकर्षित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। बेहतर प्रतिक्रिया मिलने पर भविष्य में वॉटर स्पोर्ट्स और अन्य जल गतिविधियों की शुरुआत भी की जा सकती है। इस वॉटर-वे के जरिए श्रद्धालु शनि मंदिर, भूखी माता, कर्कराज मंदिर, नृसिंह घाट, रामघाट, दत्त अखाड़ा, ऋणमुक्तेश्वर, भृतहरि गुफा, सिद्धवट, मंगलनाथ, अंगारेश्वर और कालियादेह महल जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच सकेंगे।
Published on:
03 Feb 2026 05:39 pm

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