कम होगी इंदौर की दूरी, नए ट्रैक पर इसी महीने से ट्रेन दौड़ने की उम्मीद

उज्जैन-फतेहाबाद रेल परियोजना का काम पूरा..उज्जैन-इंदौर के बीच की दूरी 16 किमी. तक होगी कम...

By: Shailendra Sharma

Published: 17 Sep 2021, 03:49 PM IST

उज्जैन. लंबे समय से जिस उज्जैन फतेहाबाद रेल परियोजना पर ट्रेन चलने का इंतजार था, अब वो पल करीब आ रहा है। रेल मंत्री अश्विनी कुमार ने उज्जैन-इंदौर क्षेत्र के यात्रियों को लाभ देने वाली इस परियोजना के पूरे होने के बाद अब ट्रेन चलाने के लिए हरी झंडी देने को समय देने की मांग को मंजूर कर लिया है। उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया के अनुसार इसी माह इस सेक्शन पर ट्रेन को शुरू किया जा रहा है। करीब 28 किमी लंबे इस रेल मार्ग पर 300 करोड़ रुपए का व्यय किया गया है।

 

16 किमी. कम होगी उज्जैन-रतलाम की दूरी
उज्जैन-फतेहाबाद रेल परियोजना के शुरु होने के बाद इंदौर-उज्जैन के बीच की दूरी 16 किमी. तक कम हो जाएगी। परियोजना का काम तय समय में पूरा करने के लिए पश्चिम रेलवे ने एक वरिष्ठ इंजीनियर मनीष कुमार को विशेष रुप से भेजा गया था। इस समय इंदौर-देवास-उज्जैन होते हुए ट्रेन 79 किमी चलती है। इस सेक्शन में ट्रेन चलने से यह दूरी मात्र 63 किमी की हो जाएगी।

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सांसद ने रेल मंत्री से की मुलाकात
दिल्ली में उज्जैन सांसद फिरोजिया ने रेल मंत्री अश्विनी कुमार से मुलाकात की। इस दौरान सांसद फिरोजिया ने रेल मंत्री को योजना का कार्य पूरा होने के बारे में जानकारी देने के साथ ही उन्हें परियोजना का उद्घाटन करने के लिए बुलवाया। बताया जाता है कि मंत्री ने इसको मंजूर कर लिया है और वो इसी माह इसकी शुरुआत करने आएंगे। हालांकि रेलवे के आला अधिकारियों के अनुसार उज्जैन आने के बजाए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मंत्री इस सेक्शन में ट्रेन चलाने का कार्य कर सकते हैं। इस सेक्शन में सबसे पहली ट्रेन डॉ. अंबेडकर नगर प्रयागराज चलेगी।

 

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110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार क्षमता
यह ट्रैक 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार क्षमता के हिसाब से बिछाया गया है। सीआरएस द्वारा बताए गए काम पूरे होने के बाद ट्रैक पर अधिकतम 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से यात्री ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। प्राथमिकता से महू-प्रयागराज ट्रेन को देवास के बजाय फतेहाबाद होकर उज्जैन की ओर चलाया जाने लगेगा। भविष्य में काशी महाकाल एक्सप्रेस जब भी शुरू होगी, तो उसे भी फतेहाबाद होकर चलाया जाएगा। प्रोजेक्ट पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गेज कन्वर्जन के तहत लाइन को विद्युतीकृत भी किया गया है।

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