"जहां कीन्हां तप तुलसी, कबीर, रैदास मोरे मितवा..." शीर्षक गीत के साथ करें घाट वॉक

-घाट वॉक पर बने टाइटल सांग का पंचगंगा घाट पर हुआ लोकार्पण
- बुद्धिजीवियों से राजनेताओं तक ने घाट वॉक शुरू करने वाले प्रो वीएन मिश्र की सराहना की
-बताया, अब तो हर घाट पर उपलब्ध है मोबाइल क्लीनिक

 

By: Ajay Chaturvedi

Published: 08 Dec 2019, 07:49 PM IST

वाराणसी. पर्यटन स्थली काशी का आकर्षण यहां के घाट हैं। इन घाटों तक जाने वाली गलियां हैं। अगर काशी को जानना है तो इन गलियों को जानना जरूरी होगा, घाटों को पहचानना जरूरी होगा। इन्हीं सोच के साथ दो साल पहले शुरू हुआ था "घाट वाक"। दरअसल इस घाट वाक की शुरूआत का उद्देश्य भी बनारस की संस्कृति, सभ्यता को जानना और पहचानना ही था। इसे शुरू किया था अकेले आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट व सर सुन्दरलाल अस्पताल के पूर्व एमएस प्रो. विजयनाथ मिश्र ने। धीरे-धीरे लोग जुटते गए और कारवां बनता गया। अब ये काशीवासियों की दिनचर्या में शामिल हो गया है।

इस घाट वाक से जहां काशीवासी खुद का स्वास्थ्य वर्धन कर रहे हैं, वहीं घाट किनारे रहने वालों को जो मिला है उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इन 84 घाटों पर चलती-फिरती डिस्पेंसरी भी उपलब्ध हो गई है। सीमित चिकित्सकी सुविधा वाले शहर में जब आपके द्वार पर क्लीनिक की सुविधा मिलने लगे तो लोगों को और क्या चाहिए। यह सब मुहैया कराया है चिकित्सकी पेशे को शिद्दत से जीने वाले प्रो वीएन मिश्र ने।

घाट वॉक टाइटल सॉंग का लोकार्पण
IMAGE CREDIT: patrika

आ गया घाट वॉक का टाइटल सॉंग

अब इस घाट वाक का टाइटल सॉंग भी आ गया है, "जहां कीन्हां तप तुलसी, कबीर, रैदास मोरे मितवा..." इस टाइटल सॉंग को तैयार किया है, अष्टभुजा मिश्रा ने और सहयोगी हैं हरिसेवक द्विवेदी। इसका लोकार्पण रविवार को पंचगंगा घाट पर हुआ। इस टाइटल सॉंग की खासियत ये है कि इसमें काशी के सभी 84 घाटों की विशेषता तो समाहित है ही, काशी के बारे में भी लगभग पूरी जानकारी दी गई है।

महामाया दुर्गोत्सव समिति और घाट वॉक की ओर से आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत शिवानी आचार्य के गंगा गीत से हुई, जिसके बोल थे ...'चलो गंगा-तुलसी तीर'। उसके बाद उन्होंने शिव गीत ... 'बतावा मितवा कहा नाही ह भोला...' की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इनके साथ तबले पर अंकित कुमार सिंह और हारमोनियम पर पंकज कुमार शर्मा ने संगत की।

इस मौके पर विख्यात संगीतकार, खयाल गायक पद्मश्री राजेश्वर आचार्य ने कहा कि पंचगंगा सभी 84 घाटों में विलक्षण है। यहां की सीढ़ियां ज्ञान और संवाद से जोड़ती है और गुरु-शिष्य परंपरा की याद दिलाती है। इन्ही सीढ़ियों पर गुरु रामानंद जी को कवीर दिखे थे।

भोजपुरी अध्ययन केंद्र के प्रो. श्री प्रकाश शुक्ल ने काशी और घाट वॉक के बीच का संबंध बताते हुए कहा कि जब दो वर्ष पूर्व घाट वॉक शुरु हुआ तो निश्चित तौर पर लोगों ने मजाक उड़ाया था मगर यह घाट वॉक नित लोगों को जागरुक करते हुए एक कड़ी जोड़ रही है। बीएचयू के समाजशास्त्र विभाग के प्रो अरविन्द जोशी ने कहा कि 84 घाट के लोगों को भले ही कुछ न मिला हो मगर उन्हें एक न्यूरोलॉजिस्ट जरूर मिला जो हर शाम आला, दवा और चिकित्सकीय सलाह के साथ उपस्थित रहता है। बीएचयू ओपीडी में दिखाने के लिए लंबी लाइन लगी रहती है मगर यहां घर के परिवेश में चिकित्सक निःशुल्क उपस्थित है।

राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने कहा कि सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले यह जानते है कि मनुष्य योनि प्राप्त करने के लिए 84 योनियों से होकर गुजरना पड़ता है, इसलिए काशी के 84 घाटों का अपना महत्त्व है। देश के जितने भी बड़े संत-साधक हुए उन्हें घाट आना पड़ता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत' को भी यह घाट वाक सफल कर रहा है। वॉकर केवल घाट पर टहलान ही नहीं करते बल्कि घाटों पर फेंके गए कचरे को भी उठाता है और साथ ही चिकित्सक उपचार भी करते रहते है।

टाइटल सांग का लोकार्पण डोमराजा जगदीश चौधरी, त्रिकाल बाबा, नारायण गुरु, गोविन्द सिंह, रामाज्ञा शशिधर की मौजूदगी में हुआ।

इस मौके पर यश्विनी मिश्रा, स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता, अभय तिवारी, पियूष आचार्य, विशाल दीक्षित, आकांक्षा श्रीवास्तव, ड़ॉ. शारदा सिंह, शैलेश तिवारी, वाचस्पति उपाध्याय, राकेश, राजकुमार आदि मौजूद रहे। स्वागत प्रो. विजयनाथ मिश्र ने किया जबकि युवा नेता अमित राय ने आभार जताया।

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