नगर आयुक्त के रूप में यूं तो डॉ. श्रीहरि प्रताप शाही ने बनारस में लगभग दो साल गुजार दिए लेकिन नगर निगम और जल कल के मुखिया होते हुए भी बनारस की हालत बद से बदतर हो गई। यहां तक कि प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को नगर निगम हमेशा पलीता लगाता रहा। पब्लिक बराबर चिल्लाती रही कि यहां सीवर बह रहा है यहां कूड़ा फेंका जा रहा है, यहां कूड़ा जलाया जा रहा है। पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई पूर्व डीएम विजय किरन आनंद के कार्यकाल में तो हद ही हो गई जब डीएम सुबह- सुबह नगर निगम पहुंच गए और नगर आयुक्त का कहीं अता पता नहीं था। तब पूर्व डीएम ने मौके से ही नगर निगम के कर्मचारियों के सामने मोबाइल पर ही नगर आयुक्त का जम कर क्लास ले लिया था। इनके बारे में एक बात बहु प्रचलित रही कि आम नागरिक तो दूर, जिले के आला अफसरों के भी फोन ये नहीं उठाते रहे।