script ठंड से ठिठुरते लोगों का ठौर रैन बसेरा खुद अव्यवस्था का शिकार, टूटी चारपाई और फटे गद्दे बयान कर रहे हाल | Varanasi night shelter a place for people shivering from cold itself victim of chaos | Patrika News

ठंड से ठिठुरते लोगों का ठौर रैन बसेरा खुद अव्यवस्था का शिकार, टूटी चारपाई और फटे गद्दे बयान कर रहे हाल

locationवाराणसीPublished: Dec 29, 2023 08:36:28 am

Submitted by:

SAIYED FAIZ

ठंड में रात के समय शहर पहुंचने वाले लोगों और सड़क और फुटपाथ पर सोने वाले लोगों की सुविधा के लिए पूरे शहर में चिह्नित स्थलों पर रैन बसेरे बनाए गए। इन रैन बसेरों पर उनके लिए सुविधाएं योगी सरकार ने दी है, जिसका रियालिटी चेक किया गया तो ये रैन बसेरे खुद ठंड में कांपते दिखे। पेश यही काशी के चार रैन बसेरों से खास रिपोर्ट...

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शेल्टर होम में चारपाई कम होने से लोगों को जमीन पर बितानी पड़ रही रात
वाराणसी। पूरे प्रदेश में ठंड से एक भी व्यक्ति कांपते हुए न मिले, इसके लिए योगी सरकार हर वर्ष ठंड में स्थायी और अस्थायी रेन बसेरों को एक्टिव करती है। पिछले दो दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड के बाद वाराणसी के रैन बसेरों में भी लोगों का रुकना शुरू हो गया है। ऐसे में जब इन रेन बसेरों की हकीकत जनाने के लिए देर रात 10 बजे के बाद कड़ाके की ठंड में शहर के चार रेन बसेरों का रुख किया तो व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। सख्त आदेश के बाद लोग जमीन पर सोते मिले तो, ज्यादातर रैन बसेरों में बिना धुले है दो से एक साल पुराने कंबल इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। कहीं पानी की व्यवस्था नहीं है तो कहीं शौचालयों में सामान भरा हुआ है। पेश काशी के रैन बसेरों से खास रिपोर्ट...
अव्यवस्थाओं से कराह रहा है कोतवाली वार्ड चौकी का रैन बसेरा

योगी सरकार की मंशा अनुरूप रेन बसेरों की व्यवस्थाएं सुदृण की गई है पर काशी एक रैन बसेरों में अव्यवस्थाओं ने इन वयवस्थाओं की पोल खोल दी। शहर के बीचों-बीच स्थित कोतवाली वार्ड चौकी के रैन बसेरा की स्थिति खराब है। यहां के केयर टेकर कमला सरोज ने बताया कि इस शेल्टर होम की क्षमता 10 लोगों की है लेकिन पिछले साल से ही तीन चारपाई टूट जाने की वजह से यहां सिर्फ 7 लोगों को ही रोका जाता है। यदि लोग ज्यादा होते हैं तो उन्हें जमीन में सुला दिया जाता है। कमला सरोज ने कहा कि दो साल पहले हमें शासन से कंबल और रजाई मिली थी। इस साल हमने खुद से कुछ कंबल जो ज्यादा गंदे थे उन्हें धुलवाया है। उनसे जब गीजर और ब्लोवर के बारे इ पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दो साल में यहां सिर्फ यह एक पंखा है वह भी खराब होता है तो हमें ही बनवाना पड़ता है। दो बार जेई साहब ने भी बनवाया है। गीजर और ब्लोवर न पिछले साल यहां था न इस साल अभी आया है। इसके अलावा अलाव की लकड़ी भी अभी तक नहीं गिरी है। इस शेल्टर में शौचालय में कबाड़ रखा गया है। उन्होंने कहा कि यहां अभी 5 खटिया की और जरूरत है।

टाउनहाल के शेल्टर में दो साल से नहीं धुले हैं कंबल

मैदागिन चौराहे से चंद कदम दूर टाउनहाल में बने शेल्टर होम भी व्यवस्थाएं भयावह हैं। यहां गोविन्द कुमार सोनकर केयर टेकर हैं। गोविन्द ने बताया कि यहां 8 बेड लगाया गया है। उसके अलावा टेंट से भी शीतलतार होम बनाया गया है जो आज कल में शुरू हो जाएगा। उनसे जब पूछा गया कि आप के शेल्टर होम की क्षमता 15 यात्रियों की है तो उन्होंने कहा कि बेड और गद्दा सिर्फ 8 है तो कैसे सुलाएं 15, जमीन पर सुला नहीं सकते हैं। वहीं उनसे जब कंबल की धुलाया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कंबल तो दो साल पुराना है। उसकी धुलाई नहीं करवाई गई है।
गोलगड्डा शेल्टर में जमीन पर सुला रहे यात्री
गोलगड्डा चौराहे के पास बने शेल्टर होम के केयर टेकर हसीन अहमद ने शेलटर की सच्चाई बताई। उन्होंने बताया कि हमारे यहां चारपाई, गद्दा, कंबल और रजाई के साथ ही साथ गीजर की व्यवस्था है। ब्लोवर के लिए आज-कल किया जा रहा है जल्द वह भी लग जाएगा। इस हेलतर होम की क्षमता 20 आदमी की है पर यहां भी चारपाई सिर्फ 11 मिली। इसपर हसीन ने कहा कि 9 चारपाई टूट गई है ऐसे में लोगों को जमीन पर सुलाने को मजबूर हैं। अधिआरियों से शिकायत की है तो उन्होंने कहा है कि जल्द है आएगी। इसबार हमें 22 कंबल और 10 रजाई मिली है। उन्होंने कहा कि सबकी धुलाई ज्यादा खत्म होने के बाद होती है। इसके अलावा ब्लोवर नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें ब्लोवर नहीं मिला है और इस शेल्टर की क्षमता के अनुसार यहां तीन ब्लोवर की आवश्यकता है।
इस शेल्टर में व्यवस्था फुल, पर कंबल...

वाराणसी सिटी स्टेशन एक ठीक सामने स्थित रैन बसेरा जिसका अक्सर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दौरे पर निरीक्षण करते रहे हैं। वहां व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। यहां के केयर टेकर रियाज अहमद ने बताया कि इस शेल्टर में स्वच्छ जल और शौचालय की समुचित व्यवस्था है। स्वच्छता पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है सोने के लिए तकिया, गद्दा रजाई और चादर की व्यवस्था है। रियाज ने बताया कि यहां 10 लोगों की क्षमता है जबकि रजिस्टर में 13 लोग का आंकड़ा दर्ज है। जब उनसे पूछा गया तो वो बागली झांकने लगे और कुछ कह नहीं पाए। उन्होंने बताया कि इस बार अभी ब्लोवर नहीं मिला है। हमें 10 रजाई मिली है और टोटल 27 कंबल यहां। इस रैन बसेरे में सीएम के निरक्षण के बावजूद व्यवस्थाओं का हाल बताने के लिए यह बता काफी है कि यहां के कंबल दो वर्षों से धुले नहीं गए हैं।

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