वर्ल्ड हेरिटेज सिटी अहमदाबाद के हेरिटेज ब्रिज -एलिस ब्रिज- की विरासत को बरकरार रखने के लिए राज्य सरकार ने अहम निर्णय लिया है। राज्य सरकार इस ब्रिज की मजबूती और मरम्मत के लिए 32 करोड़ से ज्यादा की राशि लगाएगी। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने यह राशि आवंटित करने की मंजूरी दी है।
इस ऐतिहासिक ब्रिज का स्टील स्ट्रक्चर मौसम के प्रभाव के कारण जर्जर होने के कारण यह ब्रिज पिछले दस वर्षों से आमजन के उपयोग के लिए पूरी तरह से बंद रखा गया है।
राज्य सरकार ने इस हेरिटेज ब्रिज की विरासत को बरकरार रखने और उसका समयानुसार मरम्मत कार्य अत्याधुनिक तकनीक से करने के लिए स्वर्णिम जयंती मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के तहत निर्णय किया है। पुनर्स्थापना के बाद इस ब्रिज का उपयोग आम लोग कर सकेंगे। इस हेरिटेज ब्रिज से आवाजाही कर उसकी ऐतिहासिक स्मृति को संजो सकेंगे। इसके लिए ब्रिज की मरम्मत मैथोडोलॉजी का उपयोग कर स्ट्रक्चर डिजाइन किया जाएगा।
रविवारी बाजार में आवाजाही के लिए उपयोग
एलिस ब्रिज के मजबूतीकरण और मरम्मत से साबरमती नदी के तट पर विक्टोरिया गार्डन के निकट लगने वाले पारंपरिक रविवारी बाजार में आवाजाही के लिए राहगीर इस ब्रिज का पुनः उपयोग कर सकेंगे।
मनपा ने की थी पेशकश
अहमदाबाद महानगरपालिका ने इसके लिए राज्य के शहरी विकास विभाग से पेशकश की थी। बाद में यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सामने रखा गया जिसके बाद यह रकम आवंटित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
इस तरह होगी मरम्मत
ब्रिज के मुख्य ट्रस के जोड़ों की मरम्मत, बॉटम गर्डर, बॉटमस्ट्रिंजर्स और बॉटमज्वाइन्ट्स बदले जाएंगे। नई बेयरिंग्स भी लगाई जाएगी। साथ ही कम्पोजिट पियर स्ट्रक्चर के बीच की लेसिंग और ब्रेसिंग जरूरत के अनुसार बदला जाएगा। मौजूदा पियर को जंग (कोरोजन) से बचाने के लिए एंटी-कोरोजन ट्रीटमेंट और जर्जर हो चुके बॉटमडेक स्लैब को हटाकर नया करने का कार्य भी किया जाएगा।
1892 में बना था शहर का पहला ब्रिज
साबरमती नदी पर अहमदाबाद शहर में यह पहला ब्रिज अंग्रेज शासनकाल में वर्ष 1892 में बनाया गया था। 433.41 मीटर लंबाई और 6.25 मीटर चौड़ाई वाला यह एलिस ब्रिज 30.96 मीटर के 14 स्पैन बो-स्ट्रिंग टाइप के स्टील स्ट्रक्चर में बना है।