इंजीनियर्स डे विशेष... एसएटीआइ ने 60 साल में तैयार किए 12 हजार इंजीनियर

तीन ब्रांच से शुरू हुई थी इंजीनियरिंग, अब नौ ब्रांच में सुविधा

By: govind saxena

Published: 14 Sep 2020, 09:45 PM IST

विदिशा. प्रदेश की जानी मानी इंजीनियरिंग संस्था एसएटीआइ की शुरुआत करीब 60 साल पहले हुई थी और उसने अब तक 12 हजार से ज्यादा इंजीनियर तैयार किए हैं। डिग्री का कोर्स यहां 1960-61 में शुरू हुआ और 1965 में पहले बैच के इंजीनियर्स तैयार होकर निकले। पहले पॉॅलीटेक्निक शुरू हुआ और वर्षों तक वहीं इंजीनियरिंग की कक्षाएं भी लगती रहीं। 1962 में प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने नए भवन की आधारशिला रखी लेकिन उसको बनने में लग गए 18 वर्ष। इसी परिसर में अब महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्ववैसरैया की प्रतिमा भी स्थापित है, जिनकी स्मृति में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है।

113 बीघा जमीन का मुआवजा दिया था मात्र 35 हजार
एसएटीआइ के लिए मप्र शासन ने जमीन अधिग्रहीत की थी और लोगों की निजी जमीन सहित सरकारी रकवा की करीब 113 बीघा जमीन पर कलेक्टर ने कब्जा दिलाया था। इसके बदले में सोसायटी के उपाध्यक्ष रहे बाबू तख्तमल जैन ने 35 हजार रूप मुआवजे के तौर पर जमा कराए थे।

दो दशक में बन पाया डिग्री का भवन
विदिशा में 1957 में पॉलीटेक्निक महाविद्यालय शुरू किया गया था। लेकिन 1960-61 में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्वीकृति सौ फीसदी अनुदान के साथ भारत सरकार से मिली। उसी दौरान 13 फरवरी 1962 को प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन की आधारशिला रखी। हालांकि भवन बनने में करीब दो दशक लग गए। तब तक पॉलीटेक्निक भवन में ही डिग्री की कक्षाएं लगती रहीं।

पहले थी विदिशा एजूकेशन सोसायटी, अब एमजेइएस
शुरुआत में एसएटीआइ का संचालन विदिशा एजूकेशन सोसायटी के नाम से होता था। इसमें बाबू तख्तमल जैन और बाबू रामसहाय की अहम भूमिका थी। लेकिन इंजीनियरिंग संस्थान के लिए जब जीवाजीराव सिंधिया ने गंगाजलि फंड से राशि देने का ऐलान किया तो सोसायटी का नाम भी महाराजा जीवाजीराव एजूकेशन सोसायटी कर दिया गया। जो अब तक चल रहा है। इसकी पहली अध्यक्ष विजयाराजे सिंधिया बनीं, जबकि उपाध्यक्ष बाबू तख्तमल जैन और सचिव बाबू रामसहाय बने।

इन संस्थाओं का भी योगदान
एसएटीआइ के लिए शुरुआत में जहां जीवाजीराव सिंधिया ने गंगाजलि फंड से राशि दी, वहीं नगरपालिका परिषद विदिशा और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक विदिशा सहित कृषि उपज मंडी समिति विदिशा ने भी अपने अंशदान दिए। यही कारण है कि सोसायटी में अब भी नपा परिषद के अध्यक्ष और जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष को पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है।

तीन ब्रांच हुईं थी शुरू, अब नौ ब्रांच
एसएटीआइ की शुरुआत सिविल, मैकेनिकल और इलेक््िरकल तीन ब्रांच से हुई थी, लेकिन आज इस संस्थान में 9 ब्रांच हैं। पहले बैच में 120 छात्रों ने ही प्रवेश लिया था। इनमें से तीनों ब्रांच में 40-40 विद्यार्थी थे। यहां के पहले प्राचार्य वीवी नातू थे, जिनके नाम पर यहां नातू सभागार भी बनाया गया था। नातू सहित संस्थान में इस पद पर 10 लोग बैठ चुके हैं।

ये नाम है सितारों में शामिल
एसएटीआइ के छात्रों में नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमेन और प्रबंध निदेशक वीके चतुर्वेदी,ख्राजीव गांधी प्रौद्यागिकी विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डॉ प्रीतमबाबू शर्मा, कर्नल वायएस भदौरिया, महाराष्ट्र के आइएएस सीएस संगीतराव, आइजी उज्जैन राकेश गुप्ता, आयकर उपायुक्त अवनीश तिवारी, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी नितिन ढिमोले, रणवीर सिंह एडीआरएम सहित हजारों नाम ऐसे हैं जो देश विदेश में एसएटीआइ का नाम रोशन कर रहे हैं।

govind saxena Bureau Incharge
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