
हलीम आईना
कविता-
निराशा में आशा है,
कविता-
ईश्वर की परिभाषा है।
कविता-
मदिरालय में हाला है,
कविता-
भावों का दुशाला है।
कविता-
पतन में उत्थान है,
कविता-
गंगा में स्नान है।
कविता-
दुरुपयोग में उपयोग है,
कविता-
मन का पावन योग है।
कविता-
निष्ठुरता में संवेदना है,
कविता-
सहानुभूति है प्रार्थना है।
कविता-
अज्ञान में दिव्य ज्ञान है,
कविता-
गंगा में स्नान है।
कविता-
अधर्म में धर्म है,
कविता-
बेहयाई में शर्म है।
कविता-
दुर्जन में सज्जन है,
कविता-
जीवन का दर्शन है।
कविता-
अनर्थ में अर्थ है ,
कविता -
सत्य की शर्त है ।
कविता -
नर्क में स्वर्ग है ,
कविता-
कश्मीर है, गुलमर्ग है ।
कविता-
मूर्खों में विद्वान है,
कविता-
गंगा में स्नान है ।
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Published on:
14 Aug 2021 05:21 pm
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