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ये कैसा विकास है?

शर्मनाक है भूख से मौत होना
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Sunil Sharma

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Updated: 25 Oct 2017, 4:03 PM IST

kids children

exploitation of adopted children

- प्रियंका उपाध्याय

देश में हाल ही में भूख से मौत होने की कई घटनाएं सामने आई हैं। मरने वाले सभी लोगों में एक कारण कॉमन सामने आ रहा है। ये कारण है कि ये सभी लोग सरकार से मिलने वाले सस्ती दरों के राशन पर जीवन-यापन कर रहे थे और ये राशन नहीं मिल पाया। राशन नहीं मिलने का कारण रहा आधार का बायोमैट्रिक मशीन से न जुड पाने या मशीन पर अंगूठे के निशान न आना।

भूख से किसी गरीब की मौत हो जाना हमारे देश की एक शर्मनाक घटना है। एक तरफ हम महाशक्ति बनने का दंभ भर रहे हैं तो दूसरी तरफ लोग भूख से मर रहे हैं। यह बडा़ विरोधाभासी विकास है। इस विकास के मॉडल की मार सिर्फ गरीब लोग झेल रहे हैं। सरकार योजनाओं में पैसा बचाने के लिए सिर्फ गरीब लोगों के लिए ही आधार जैसी योजनाएं लागू कर रही है। अमीरों पर ऐसे योजनाओं का कोई असर नहीं पड़ रहा है। अमीर लोग तो आज भी एशो-आराम से अपनी जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं।

सरकार में बैठे जिन लोगो ने इस तकनीक को लागू किया, जिन गरीबो के राशन में पारदर्शिता लाने के प्रयास किए, वो सब उन्हीं के लिए मुश्किलें ला रहा है, सरकार को नयी तकनीक लाने और लागू करने से पहले इससे जुड़े लोगो को अच्छी तरह प्रशिक्षित करने व समय-समय पर वर्कशॉप आयोजित करने की आवश्कता हैं, जिस से ऐसी छोटी समस्या का निपटारा होने में अनावश्यक समय ना लगे और गरीब को उसका हक़ समय पर मिल जाए वरना समाधान में हुई देर का परिणाम आज झारखण्ड में प्रत्यक्ष है।

सरकार को आधार से योजनाओं को जोडऩे में आ रही परेशानियों को देखते हुए इनके स्थाई समाधान के प्रयास करने जरूरी होंगे। साथ ही ऐसी समस्या के समाधान हेतु एक अन्य विकल्प रखने की भी आवश्यकता है जिस से फिर किसी गरीब को भूख से ना मरना पड़े और देश को शर्मसार नहीं होना पड़े।