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बायस्ड लीडर के साथ ऐसे करें काम

अगर आपको लगता है कि आपका लीडर बायस्ड है तो आप खास लक्षणों से इसके बारे में पता लगा सकते हैं।

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Amanpreet Kaur

Jun 10, 2018

biased boss

biased boss

अगर आपको लगता है कि आपका लीडर बायस्ड है तो आप खास लक्षणों से इसके बारे में पता लगा सकते हैं। हो सकता है कि वह टीम में आपको छोडक़र अन्य साथियों को ज्यादा बजट और आगे बढऩे के अवसर मुहैया करवाता हो, उन्हें ज्यादा रिवार्ड दिलवाता हो या ज्यादा बात करता हो। इससे आपकी परफॉर्मेंस और टीम कल्चर पर नेगेटिव असर पड़ता है। जानते हैं कि वर्कप्लेस पर बायस्ड बॉस से कैसे डील किया जाए-

अलग विचार करें

पता करें कि आप बायस्ड बॉस से पीडि़त हैं भी या नहीं। पूरी स्थिति के बारे में ठंडे दिमाग से विचार करें। पता करें कि आपके साथ बॉस भेदभाव क्यों कर रहा है। हो सकता है कि बॉस अपने पसंदीदा एम्प्लॉइज के भले के लिए काम कर रहा हो और इससे आपको बुरा लग रहा हो। इसलिए सबसे पहले जरूरी है कि अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

सकारात्मक रहें

किसी भी स्थिति का सामना करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप सकारात्मक रहें। चाहे जो हो जाए, आप मेहनत करना बंद न करें। याद रखें कि परफॉर्मेंस से ही आप खुद को पेश कर सकते हैं। आप मैनेजर से पर्सनल लेवल पर बात कर सकते हैं कि आप काम को बेहतर कैसे बना सकते हैं। आपको उसके सुझावों को अपने कार्यों में शामिल करना चाहिए।

डॉक्यूमेंटेशन करें

अगर आप अपने बॉस के बायस्ड व्यवहार को समझना चाहते हैं तो डॉक्यूमेंटेशन पर ध्यान दें। जहां भी आपके साथ ज्यादती हुई है, उसका डॉक्यूमेंट तैयार रखें। यह काम करते समय ईमानदारी बरतें। यह ब्योरा संक्षिप्त होना चाहिए ताकि किसी भी व्यक्ति को तुरंत समझ में आ जाए।

बातचीत करें

आप अपने मैनेजर से इस बारे में बात कर सकते हैं। किसी पर आरोप लगाने के बजाय समस्या पर फोकस करें। कोई स्टेटमेंट देने के बजाय अपनी स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास करें। बातचीत के दौरान शांत बने रहें। मैनेजर को बताएं कि आपको क्या परेशान हो रही है और इसे कैसे दूर कर सकते हैं। व्यक्तिगत आरोप लगाने से बचें।

अन्य विकल्पों पर गौर

अगर आपको महसूस होता है कि आपको अपने बॉस के कारण अच्छे अवसर या पहचान नहीं मिल पा रहे हैं तो आपको अन्य विकल्पों पर भी गौर करना चाहिए। कई कंपनियां एम्प्लॉइज को मौका देती हैं कि वे मैनेजर या प्रोजेक्ट में बदलाव कर सकते हैं। इसका फायदा उठाएं। अगर हर तरफ प्रयास करने के बाद भी कोई हल नहीं निकले तो मामला कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट तक ले जाना चाहिए।