आपको खुद को कहना होगा- हो जाओ तैयार। आपको बदलाव के लिए मन को मजबूत बनाना होगा। मैं धडक़ते हुए शहर बरेली से हूं। मेरे डैड आर्मी में डॉक्टर थे, इसलिए उनका तबादला होता रहता था। बार-बार नए शहर में जाने का अपना मजा भी था और कभी-कभी यह सजा भी लगता था। ऐसे मे डैड हमेशा कहते थे, ‘फतह’। डैड ने मुझे बताया है कि फौजी को अपनी चोटों की परवाह नहीं होती, वह बस मोर्चें पर जाने के लिए तड़पता है। बचपन में जब सुनती थी तो रोंगटे खड़े हो जाते थे लेकिन अब लगता है कि हौसले और जिंदादिली का कोई मुकाबला नहीं। वास्तव में मोर्चा कोई भी हो, हमें हमेशा फतह के बारे में सोचना चाहिए। हमारी कोहनी छिल जाती है तो हम आंसू बहाने लगते हैं, उनके बारे में सोचिए जिनके हाथ ही नहीं होते। वे फिर भी जीते हैं और शान से जीते हैं। मुझे लगता है कि जीत का ऐसा जज्बा हरेक इंसान में होना ही चाहिए। सारे डर, सारी समस्याएं एक तरफ रखिए और दूसरी तरफ फतह का मंत्र। मैंने खुद सीखा, आगे बढ़ी और सफलता प्राप्त की। अगर मैं एक बार डर जाती तो फिर कहीं नहीं पहुंच पाती।