
diljit dosanjh
अपने जीवन के संघर्ष और बॉलीवुड तक अपने सफर के बारे में सिंगर व एक्टर दिलजीत दोसांझ ने विस्तार से बात की। उन्होंने बताया, एक समय था जब लोग कहते थे कि बॉलीवुड में पगड़ी वाले का क्या काम लेकिन अब कोई कुछ नहीं बोलता, ‘उड़ता पंजाब’ हो या ‘फिल्लौरी’, पगड़ी ही मेरी ताकत बनी रही। मैं हर किसी से यही कहूंगा कि अपनी जमीन नहीं छोडऩा और आसमान की तरफ बढ़ते रहना। पंजाबी फिल्में और संगीत मेरी जड़ है, जिसे मैं कभी नहीं भूलता। अगर मैं अपनी जड़ें भूल जाता तो कहीं नहीं पहुंच पाता। दूसरी बात, ऊपर वाले पर मेरा अटूट भरोसा है। छोटे से पिंड (गांव) से निकल कर लुधियाना और फिर बम्बई, मैं गांव का बंदा आज कहां पहुंच गया। मैं जब भी मुश्किल में घिरा, मैंने ऊपर वाले को याद किया और परेशानी दूर होती चली गई।
छुटपन में गुरुद्वारे के कीर्तन में तबला बजाता था और ऐसे संगीत मुझमें उतर गया। एक्टिंग भी ऐसे ही ऑब्जर्व करते-करते आ गई। सुना था कि जाना भले ही कितनी भी दूर हो, चलना करीब देख-देख कर ही। आसपास की दुनिया को गौर से देखा और देख-देख कर सीखता चला गया। गुरुद्वारों की संगत ने मुझे भलाई करना सिखाया है। मैं मानता हूं कि किसी का बुरा मत करो और आपका भला अपने आप होता रहेगा। हमने एक फाउंडेशन बनाया है- सांझ फाउंडेशन। हम वंचित बच्चों और बुजुर्गों में भरोसा भरने का काम करते हैं, सलाह और संसाधन देते हैं। मेरा मानना है कि आप अपने बूते भर जो भी कर सकते हैं, वह कीजिए। इससे मिलने वाले संतोष और दुआओं का कोई मोल नहीं। मेरे जो दिल में है, वह मेरे चेहरे पर और मेरी जुबान पर है।
लोग कहते हैं कि मैं सीधा हूं, घमंड नहीं करता। मैं सोचता हूं कि असल में घमंड करने जैसा किसी के पास कुछ होता भी नहीं है। लोग नाहक ही फूले-फूले फिरते हैं, जबकि हर डाल को टूट जाना है। कोरा इतराने से होता बस यह है कि लोग छितराने लगते हैं और अच्छे मौके भी दूर से ही नमस्ते कर निकल जाते हैं।
आप जो भी करते हो, अगर पूरी लगन से करते हो तो इसका फल अच्छा ही मिलेगा। जैसा चाहते हो, वैसे नतीजे न भी मिलें तो भी अपना सौ-फीसदी देने की तसल्ली कोई नहीं छीन सकता। यही सबसे सोणी गल है बाकीतो दुनिया आनी-जानी है। सीखा हुआ बेकार नहीं जाता। वह काम आएगा और ऐसा चमत्कार करेगा कि सबकी शिकायतें दूर हो जाएंगी।
Published on:
25 Apr 2018 04:20 pm
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