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तनाव से मुक्ति पाएंगे तो मिलेगी सफलता

हर नई पीढ़ी के अपने अलग तनाव होते हैं। आगे बढऩे तक की चाह युवाओं पर भारी पड़ रही है

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Amanpreet Kaur

Sep 06, 2017

tension free life

tension free life

हर नई पीढ़ी के अपने अलग तनाव होते हैं। आगे बढऩे तक की चाह युवाओं पर भारी पड़ रही है। हम में से कई लोग ऑफिस से थके-हारे घर पहुंचते हैं, जूते उतारते हैं और सीधे टीवी के सामने बैठ जाते हैं। इसके बाद टीवी पर अपना पसंदीदा शो देखते हैं। हमें पता है कि यह जिंदगी जीने का सही तरीका नहीं है, पर इसमें बदलाव करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। यूनिवर्सिर्टी ऑफ टोलेडो में हुए एक अध्ययन के मुताबिक लगातार टीवी देखने से आपकी मेंटल हेल्थ पर नेगेटिव असर पड़ता है। अगर थोड़ी सावधानी रखें तो इस तनाव को दूर किया जा सकता है।

सोशल मीडिया

हेल्थ एक्सपर्ट सोशल मीडिया को तनाव का कारण मानते हैं। सोशल मीडिया जीवन को नियंत्रित करता है। यदि युवा आउङ्क्षटग पर जाते हैं, तो वे घूमने का मजा लेने के बजाय परफेक्ट फोटो की तलाश में रहते हैं ताकि उसे ऑनलाइन अपलोड कर सकें और हर बता सकें कि वे क्या कर रहे हैं। यह तनाव का कारण बनता जा रहा है।

फिटनेस और एक्टिविटी ट्रैकर

आजकल बाजार में एक्टिविटी ट्रैकर और फिटनेस गैजेट्स की बाढ़ सी आ गई है। इनसे आप हर चीज ट्रैक कर सकते हैं, फिर चाहे वो आपके द्वारा तय किए गए कदम हों, हार्टबीट हो या रात की नींद के बारे में जानकारी। फिटनेस पसंद करने वाले युवाओं के लिए ये काफी उपयोगी भी साबित हो रहे हैं, पर जरूरत से ज्यादा जानकारी जानकारी कभी-कभी फायदेमंद साबित होने के बजाय तनाव का कारण बन जाती है।

डिजिटल निर्भरता

आजकल हर व्यक्ति हमेशा ऑनलाइन कनेक्टेड रहता है। लोगों के लिए फ्री वाई-फाई से ज्यादा अच्छा शब्द कोई नहीं है। ऐसी स्थिति में कम बैटरी, डेड मोबाइल फोन या गैजेट्स के कारण दिमाग खराब हो जाता है। इंटरनेट पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता से डिजिटल एमनेसिया हो रहा है और मेमोरी कम हो रही है।

ऑनलाइन व्यवहार

आजकल ज्यादातर लोग ऑनलाइन शॉपिंग, स्टॉक ट्रेडिंग, गेमिंग आदि में शामिल हो रहे हैं। साथ ही वित्तीय और नौकरी संबंधी समस्याओं में भी इजाफा हो रहा है। लोगों को ऑनलाइन ऑफर्स के चक्कर में फंसकर ज्यादा खरीदारी से बचना चाहिए। इससे पैसे का नुकसान होता है और ज्यादा फायदा नहीं होता। ऑनलाइन शॉपिंग का चस्का अच्छा नहीं है।

ईकोलॉजी अलार्म

पूरी दुनिया में तेजी से पर्यावरणीय बदलाव हो रहे हैं। इन बदलावों के कारण लोगों के सोचने का अंदाज बदल गया है। अब लोगों से कहा जा रहा है कि वे कार पूलिंग करें, पानी के बजाय सूखी होली खेलें, बिजली बचाएं आदि। आज हर व्यक्ति को ज्यादा संसाधन चाहिए, पर बचत के बारे में वह विचार नहीं कर रहा है, जबकि संसाधनों की बचत से ही भविष्य बेहतर बन सकता है। सबको ईकोलॉजी अलार्म को समझना चाहिए।