
Ulf Kristersson with Antony Blinken
स्वीडन (Sweden) पिछले काफी समय से नाटो (NATO - North Atlantic Treaty Organization) में शामिल होने का प्रयास कर रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बाद से ही स्वीडन को लगने लगा कि नाटो में शामिल होना ज़रूरी है। नाटो 31 देशों का एक ऐसा ग्रुप है जिसमें 29 यूरोपीय देश और 2 नॉर्थ अमेरिकी देश शामिल हैं। नाटो के सभी मेंबर देश सैन्य मामलों में एक-दूसरे की मदद करते हैं। इसका सबसे ज़्यादा फायदा नाटो में शामिल छोटे देशों को मिलता है। स्वीडन और रूस की बॉर्डर जुड़ती है और इसी वजह से स्वीडन भी काफी समय से नाटो में शामिल होना चाहता है क्योंकि उसे भी रूस से खतरा महसूस होता है। पर अब नाटो में शामिल होने का स्वीडन का इंतज़ार खत्म हो गया है।
नाटो में शामिल हुआ स्वीडन
स्वीडन अब नाटो में शामिल हो गया है। गुरुवार को स्वीडन के नाटो में शामिल होने की घोषणा हो गई। नाटो प्रमुख जेंस स्टोल्टेनबर्ग (Jens Stoltenberg) ने भी इस बात की पुष्टि की और अमेरिका (United States Of America), जो नाटो का फाउंडर देश है, के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) ने स्वीडिश पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन (Ulf Kristersson) से मिलकर सभी ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करते हुए पेपरवर्क पूरा करने की प्रोसेस में मदद की और नाटो में उनका स्वागत किया।
बना 32वां सदस्य देश
स्वीडन अब नाटो का 32वां सदस्य देश बन गया है।
स्वीडिश पीएम ने दिया धन्यवाद
स्वीडिश पीएम क्रिस्टर्सन ने सोशल मीडिया पर स्वीडन का नाटो का सदस्य बनने की पुष्टि की। साथ ही 32वें सदस्य के रूप में स्वीडन का स्वागत करने के लिए नाटो के सभी सहयोगियों को धन्यवाद दिया। क्रिस्टर्सन ने कहा कि स्वीडन एकता, एकजुटता और बोझ-बंटवारे के लिए प्रयास करेंगे, और वॉशिंगटन संधि के मूल्यों, स्वतंत्रता, लोकतंत्र, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के शासन का पूरी तरह से पालन करेंगे। साथ ही क्रिस्टर्सन ने यह भी कहा कि एक साथ वे सभी और मजबूत हैं।
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Published on:
08 Mar 2024 11:16 am
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