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किसकी होगी ‘आप’ 14 अप्रेल को होगा फैसला

दिल्ली सहित देशभर में फैले आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और कार्यकर्ता इस असमंजस में है कि आखिर 'आप' किसकी पार्टी है। क्योंकि पार्टी में दो गुट बन गए हैं।

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Firoz Khan Shaifi

Apr 01, 2015

दिल्ली सहित देशभर में फैले आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और कार्यकर्ता इस असमंजस में है कि आखिर 'आप' किसकी पार्टी है। क्योंकि पार्टी में दो गुट बन गए हैं।

आगामी चौदह अप्रेल को एक बार फिर दोनों गुटों के बीच शक्ति प्रदर्शन देखा जाना संभव हेागा। कारण कि योगेंद्र-भूषण गुट ने इसी दिन फिर से राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक यह कह कर बुलाई हैकि पहली बैठक असंवैधानिक है। अब यह देखने वाली बात होगी 'आप' पार्टी की इस बैठक में कौन सा गुट भारी पड़ता है।

औपचारिक घोषणा मात्र
कभी खुद को छोटा-बड़ा भाई मानने वाले अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव के बीच खाई इतनी चौड़ी हो चुकी है कि इसे पाटना अब मुमकिन नहीं लगता। इंतजार बंटवारे के औपचारिक घोषणा मात्र का है।
हालांकि योगेंद्र गुट यह मान चुका है कि पार्टी का दो फाड़ होना निश्चित है। अब योगेंद्र गुट सोच रहा है कि वैकल्पिक राजनीति देने के दावे से निकली आम आदमी पार्टी को केजरीवाल गुट के पाले में जाने दिया जाए या फिर अपनी राह नई चुनी जाए। 14 अपे्रल को बुलाई गई बैठक इसी रणनीति का हिस्सा है।

दावा ठोकना संभव
राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है कि बैठक में शक्ति प्रदर्शन करके योगेंद्र यादव आप पर अपना दावा ठोंक सकते हैं।

योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण समेत उनके सभी सहयोगियों ने बेशक राष्ट्रीय परिषद में गुंडागर्दी का आरोप लगाया है, लेकिन अभी तक किसी नेता ने पार्टी तोडऩे की बात नहीं की है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि अभी तक हम असमंजस में है कि यह पार्टी किस गुट की है।

इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। भले ही टीम केजरीवाल राष्ट्रीय परिषद की बैठक को अपने पक्ष में बता रही है। लेकिन विपक्षी गुट ने बैठक की संवैधानिकता पर ही सवालिया निशान लगाया है। इसके कानूनी पहलू पर विचार हो रहा है।

प्रशांत भूषण ने भी कहा है कि सभी विकल्प खुले हैं। जरूरत होने पर मामले की अदालत या चुनाव आयोग में अपील होगी।

कौन किसके साथ
दूसरी तरफ राष्ट्रीय परिषद की बैठक के सियासी पहलू की भी काट निकाली जा रही है। योगेंद्र यादव के खेमे ने 14 अप्रैल को दोबारा राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाई है। इसके अलावा देश भर से आप समर्थकों से बैठक में शामिल होने की अपील की गई है।

इतना ही नहीं आप के मौजूदा सांसदों व विधायकों को भी पाले में लाने की कोशिश हो रही है, जिससे साबित किया जा सके कि जनप्रतिनिधि भी उनके साथ हैं। पूरी बैठक को शक्ति प्रदर्शन के तौर देखा जा रहा है।

अगर बड़ी संख्या में परिषद के सदस्यों की मौजूदगी 14 अपे्रल की बैठक में होती है तो टीम योगेंद्र का आप पर दावा मजबूत हो जाएगा। इससे कानूनी तौर पर भी इनको बढ़त मिल जाएगी।