
महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के हड्डी रोग विभाग ने 125 वर्ष के साधु और आजाद हिंद फौज के सिपाही को दर्द से राहत देने का दावा किया है। डूंगरपुर जिले में वेणेश्वर के समीप बोरेश्वर जंगल निवासी साधु सीताराम को उनके भक्त 16 मार्च को फ्रेक्चर की शिकायत पर यहां लाए थे। कुछ राहत मिलने के बाद वे साधु को पुन: मठ पर ले गए। दोबारा तकलीफ होने पर शिष्य फिर उपचार के लिए लेकर आए तो चिकित्सकों ने 'हिप जॉइंट फ्रेक्चर का ऑपरेशन किया। सेहत में पूरी तरह से सुधार के बाद 22 अक्टूबर को साधुराम को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
चिकित्सकों ने बताया कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और मरीज को चलने-फिरने में तकलीफ नहीं होगी। खुद को आजाद हिन्द फौज का सिपाही बताने वाले सीताराम की मानें तो आजादी की लड़ाई में उन्होंने एक हाथ खो दिया था। बाद में बोरेश्वर जंगल स्थित शिव-हनुमान के मंदिर को ठिकाना बनाया। शिष्यों में उनकी पहचान बाल बह्मचारी की है। रामानंद कुल के साधु को अविन्यासी पीठ पर बिराजने के अधिकार प्राप्त हैं।
साधु के पास हैं प्रमाण
जोगीवाड़ा निवासी और साधु के भक्त भगवानदास वैष्णव ने बताया कि सीताराम की उम्र 125 वर्ष से अधिक है। स्थानीय लोगों के बीच उनको सौ साल से ज्यादा हो गए। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में जन्मे सीताराम अधिकांश समय जंगल में रहना पसंद करते हैं। शहर में कम जाते हैं। उनके पास नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ दुर्लभ फोटो और अन्य प्रमाण भी हैं।
नहीं थी उम्मीद
- हिप जॉइंट का ऑपरेशन यूं तो बड़ा नहीं है, लेकिन इस उम्र में एनीस्थिसिया देकर ऑपरेशन करना और हड्डियों का फिक्स होना दुर्लभ होता है। आजाद हिन्द फौज का सिपाही होने की जानकारी के बाद चिकित्सालय ने विशेष सेवाएं मुहैया कराईं। सही उम्र बताना तो मुश्किल है, लेकिन 100 से अधिक होना तय है।
- डॉ. विनय जोशी, प्रमुख, हड्डीरोग विभाग।
Published on:
26 Oct 2016 02:07 pm
