
इस तरह से देखा जाए तो यूरोपियन यूनियन का बजट एमजेएसए में खर्च कर प्रशासन इसका तगमा मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान को देने की तैयारियों में जुट गया है। विभागीय सूत्रों की माने तो इस बजट में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, टांका, पशु प्याऊ हौदी, तालाब जीर्णोद्धार समेत जल स्वावलंबन से जुड़े कार्य किए जाने हैं। इस तरह एमजेएसए2 के जो भी कार्य यूरोपियन यूनियन सहभागिता कार्यक्रम के डीपीआर से मेल खाएगा, उस कार्य में इस बजट को लगाया जाएगा।
पहलेे स्वच्छता के भी कार्य किए
जिले को सुदृढ बनाने के लिए यूरोपियन यूनियन सहभागिता कार्यक्रम के तहत पहले भी 6 करोड़ 40 लाख का बजट प्रत्येक ग्राम पंचायत के हिसाब से दो-दो लाख रुपये के आंकड़ों में दिए गए थे। इस बजट को खर्च करने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा इंटीग्रेटेड वाटर रिर्सोसेज मैनेजमेंट प्लान बनाया गया था। जबकि जल स्वावलंबन के अलावा कई स्वच्छता संबंधि कार्य भी किए गए। सूत्रों की माने तो यह बजट सिर्फ जल स्वावलंबन में लगाया गया होता तो ग्राम पंचायतों की तस्वीर कुछ और होती।
इस तरह बांटे थे पहला बजट
वर्ष 2010-11 में बनाए गए डीपीआर के अनुसार यूरोपियन यूनियन सहभागिता कार्यक्रम द्वारा जिले के सोजत व जैतारण ब्लॉक के लिए क्रमश: 76 व 66 लाख दिए गए। इसके बाद बाली, देसूरी, मारवाड़ जंक्शन, पाली व सुमेरपुर के लिए क्रमश: 78, 48, 94, 46 व 58 लाख दिए गए। इसी क्रम में पिछले वर्ष रानी, सुमेरपुर और रोहट के लिए क्रमश: 58, 70 व 46 लाख आवंटित हुए थे।
यूरोपियन यूनियन सहभागिता कार्यक्रम के तहत वर्तमान में जारी 5 करोड़ का बजट जल स्वावलंबन के कार्यों में लगाना है। इसलिए एमजेएसए से मेल खाने वाले डीपीआर को इसमें जोडऩे के निर्देश हमें मिले हैं। पहले के आवंटित बजट में किए गए कार्यों का विवरण पंचायत समितियों द्वारा अभी हमारे पास नहीं आया है।
एके सोनगरा, ओआईसी, यूरोपियन यूनियन सहभागिता कार्यक्रम
Published on:
31 Jan 2017 02:00 pm
