
-स्वतंत्रता सैनानी स्व. लालचंद जोशी के परिवारजनों से राजस्थान पत्रिका ने बांटे अनुभव
धन्य, जन्म जग लील तासू, परहित सर्व निछावर जासू। स्वतंत्रता दिवस पर एक बार फिर कई आंखे सजल हो रही है, उस विभूति को याद कर, जिसने अपना जीवन ही राष्ट्र को समर्पित कर दिया। स्वतंत्रता सैनानी स्व. लालचंद जोशी के परिवार जनों को गर्व है कि उन्होंने उस पुण्यात्मा के घर जन्म लिया है, जिसने न केवल उनके परिवार, बल्कि जिले व प्रदेश का नाम भी देश दुनिया में विख्यात कर दिया।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राजस्थान पत्रिका टीम ने स्वतंत्रता सैनानी स्व. लालचंद जोशी के घर जाकर उनके परिवार जनों की भावनाएं जानी। स्व. जोशी के परिवारजनों में गर्व का माहौल था, वहीं दिल में एक पीड़ा भी थी। उनकी पत्नी सखीदेवी देश की स्वतंत्रता का उत्साह से बखान करती है। वे बताती है कि जोशी सदैव ग्रामीण व गरीब लोगों को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते थे।
उनके परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कोई समझौता नहीं किया। स्व. जोशी के परिवार में नटवरलाल, सुशील व सुरेश जोशी पुत्र, प्रतिका व सीमा पुत्रवधु भी है। उनके परिवारजन बताते है कि जोशी ने देश की आजादी के बाद भी मद्य आंदोलन शुरू किया और अनुसूचित जन जाति व पिछड़ी जाति की सेवा में जुट गए।
सुराज व स्वराज के लिए खादी का प्रचार-प्रसार किया। कुप्रथाओं का विरोध करते हुए शिक्षा की अलख जगाई। स्व. जोशी के दोहित्रे दिलीप चूरा बताते है कि देश की आजादी के लिए यातनाएं झेलने पर भी उनके कदम कभी नहीं डगमगाएं। परिवार की चिंता किए बगैर पूरी जवानी आजादी की लड़ाई में झोंक दी। स्व. जोशी को जीवन के अंतिम दिनों में सरकार व प्रशासन ने न तो सुध ली और न ही उनके निधन के छह वर्ष बाद ही उनके परिवारजनों को ही सुध ली जा रही है। यहां तक कि उन्हें सरकारी कार्यक्रम या समारोहों में आमंत्रित तक नहीं किया जाता, यह बात उन्हें पीडि़त करती है।
जोशी के परिवार पर नजर-
- 1918 में 11 जनवरी को हुआ लालचंद जोशी का जन्म
- 10 माह की अल्प आयु में ही सिर से उठ गया माता-पिता का साया
- 20 वर्ष की आयु में जैसलमेर प्रजामंडल के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े
- 1955 में जोशी को दिया गया जल बोर्ड का दायित्व
- 1962 में कबीर बस्ती में खादी की स्थापना कर दलितों के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराए।
- 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जोशी को किया ताम्र पत्र से सम्मानित
- 2010 में 12 फरवरी को सोनार दुर्ग स्थित मकान में हुआ निधन
Published on:
15 Aug 2016 01:08 am
