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जल्द ही बदल जाएगा 40 साल पुराने ’20 सूत्री कार्यक्रम’ का स्वरूप

योजना आयोग को नीति आयोग में बदलने और इसमें मनमाफिक परिवर्तन करने के बाद अब केन्द्र सरकार इंदिरा गांधी के समय शुरू हुए महत्वपूर्ण 20 सूत्री कार्यक्रम को नया रूप देने की तैयारी में है। 

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Deepak Mishra

Nov 17, 2015

योजना आयोग को नीति आयोग में बदलने और इसमें मनमाफिक परिवर्तन करने के बाद अब केन्द्र सरकार इंदिरा गांधी के समय शुरू हुए महत्वपूर्ण 20 सूत्री कार्यक्रम को नया रूप देने की तैयारी में है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की पहल के बाद 'स्वच्छ भारत मिशन' और गरीबों के लिए घर मुहैया कराने जैसे कार्यक्रमों को इसमें शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

इसका जिम्मा नीति आयोग को सौंपा गया है और उसे 31 दिसंबर तक अपनी सिफारिशें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंपनी हैं।
India

गौरतलब है कि इंदिरा गांधी ने 1975 में 20 सूत्री कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत विभिन्न राज्यों में तय मानकों के आधार पर गरीबी उन्मूलन के साथ रोजगार सृजन, खाद्य सुरक्षा, गरीबों के लिए मकान के आधार पर हर राज्य की प्रगति का जायजा लिया जाता है।

लेकिन मोदी सरकार इसके तय मानकों में परिवर्तन कर अपने एजेंडे के अनुरूप ढालने की तैयारी में है। केन्द्र सरकार चाहती है कि इसके मानक ऐसे हों जिसके आधार पर टिकाऊ विकास का लक्ष्य पाया जा सके।
Indira Gandhi

सरकार जिन नए मानकों को शामिल करना चाहती है उनमें सभी के लिए भोजन की उपलब्धता, सस्ती और सर्वसुलभ स्वास्थ सेवाएं, सभी के लिए घर, रोजगार सृजन, ग्रामीण लोगों के लिए स्किल विकास शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद नीति आयोग इसको अंतिम रूप देने में जुटा है।

नए नाम पर भी विचार
केन्द्र सरकार इसका नाम भी बदलने पर गंभीरता से विचार कर रही है। जिन नामों की चर्चा है उनमें 'दीन दयाल उपाध्याय सामाजिक विकास लक्ष्य', 'डॉ. अबेडकर सामाजिक उत्थान लक्ष्य' और 'वीर सावरकर सामाजिक उत्थान योजना शामिल' हैं।
niti aayog

हालांकि इस बात की संभावना भी है कि अंतिम समय में इस योजना का नाम 'प्रधानमंत्री सामाजिक उत्थान विकास योजना' भी हो सकता है।

राज्यों से मांगी राय
केन्द्र सरकार ने 20 सूत्री कार्यक्रम को अधिक व्यावहारिक और जनहितैषी बनाने के लिए राज्य सरकारों से भी राय मांगी है। राज्य सरकारों को इसमें शामिल करने वाले कार्यक्रम की सूची प्राथमिकताओं के आधार पर देने के लिए कहा है।
modi cabinet

सरकार चाहती है कि राज्यों से मिलने वाले उपयोगी सुझावों को शामिल कर इसे और अधिक लाभकारी बनाया जाए।