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रेलवे कर्मचारियों ने भारत सरकार के फैसले के खिलाफ मनाया काला दिवस, रेलवे मजदूर यूनियन ने कहा..

रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों कर्मचारी जमा हो कर काली पट्टी और झण्डे लेकर बोर्ड की ओर से जारी किए गए आदेश पर अपना विरोध जताया। इस दौरान जुलूस भी निकाला गया।

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Punit Kumar

Feb 07, 2017

railway

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सोमवार को आल इण्डिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के आह्वान के बाद रेलवे मजदूर यूनियन के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने काला दिवस मनाया। सेफ्टी कैटगिरी को लेकर रेलवे बोर्ड ने 4200 और उससे अधिक ग्रेड-पे के सुपरवाइजरों को यूनियन के पदों पर न रखने के लिए निर्देश दिए हैं। जिसके बाद काला दिवस मनाकर अधिकारियों ने अपना विरोध जताया है।

तो वहीं रेलवे मजदूर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष सैयद शकील के नेतृत्व में यहां यूनियन के कार्यालय में एक सभा का आयोजन कर इसका विरोध किया गया। जहां शकील ने कहा कि रेलवे बोर्ड का निर्णय का हम विरोध करते हैं।

साथ ही कहा यूनियन की सेवा करना हर कर्मचारी का अधिकार है। और रेलवे बोर्ड कर्मचारियों को यूनियन की सेवा से अलग करने की कोशिश में लगा है। जो कि उसकी मनमानी है। ऐसा करने से रेलवे यूनियन कमजोर होकर अपने कर्मचारियों की बात रेल मंत्रालय में नहीं रख सकेगा।

तो वहीं इसके बाद स्टोर डिपो, सिग्नल, प्रेस कार्यालय, यांत्रिक कारखाना और रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों कर्मचारी जमा हो कर काली पट्टी और झण्डे लेकर बोर्ड की ओर से जारी किए गए आदेश पर अपना विरोध जताया। इस दौरान जुलूस भी निकाला गया। तो वहीं रेलवे यूनियन की ओर की गई सभा में कई अधिकारी भी मौजूद रहें।

सभा में मौजूद एनसीआरएमयू के शाखा अध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि संरक्षा के 4200 और 4600 पे-ग्रेड के सुपरवाइजरों को रेलवे यूनियन से बाहर कर दिया गया है जो कि रेलवे बोर्ड का एक मनमाना फैसला है। जो कि भारत सरकार के मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ है। जिसे लेकर पूरे देशभर में काला दिवस मनाया गया है।

साथ ही उन्होंने कहा कि यह विरोध तब तक जारी रहेगा। जब तक कि रेलवे बोर्ड अपने तुगलकी फरमान को वापस नहीं ले लेती है। इसके साथ यूनियन अधिकारियों को रेलवे बोर्ड इस बात को लेकर इसलिए भी नाराजगी है क्योकिं आदेश जारी करने से पहले मामले पर बोर्ड ने उनकी सलाह तक नहीं ली।

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