पर्यावरणविद् आर.के.पचौरी पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाने वाली महिला ने ऊर्जा शोध संस्थान टेरी की अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है।महिला ने संस्था पर उसके साथ 'बुरे से बुरा बर्ताव करने और 'कर्मचारी की हैसियत से हितों की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
29 साल की महिला ने अपने इस्तीफे में लिखा है, ''आपकी संस्था ने मेरे साथ जितना संभव था उतना बुरा व्यवहार किया। टेरी बतौर कर्मचारी मेरे हितों को संभालने तक में नाकाम रहा, उन्हें बचाने की तो कोई बात ही नहीं है।
महिला ने इसी साल फरवरी में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि 75 साल के पर्यावरविद् वैज्ञानिक पचौरी ने उसे टेरी में आने के बाद से परेशान करना शुरू कर दिया था। पचौरी ने गलत तरह के ई-मेल, व्हाट्स अप मैसेज, मोबाइल मैसेज भेजे थे। पचौरी ने आरोप को गलत बताया था।
उन्होंने कहा था कि उनके मोबाइल और ई-मेल को हैक कर लिया गया था।महिला ने अपने इस्तीफे में लिखा है, ''संस्था ने उल्टे पचौरी को ही बचाना शुरू कर दिया। उन्हें पूरी छूट दे दी। जबकि, आपकी खुद की जांच समिति ने पचौरी को कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ का दोषी पाया था। गवर्निंग काउंसिल ने भी मुझे निहायत अजीब तरीके से नीचा दिखाया। काउंसिल जिसके खिलाफ जांच हो रही है उसे निलंबित तक नहीं कर सकी और आरोप सही पाए जाने पर भी कोई कार्रवाई नहीं कर सकी।
महिला ने यह भी लिखा है कि उसने प्रार्थना की थी कि ऐसा न किया जाए लेकिन फिर भी संस्था में उसका काम बदल दिया गया। और, इसकी कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। उसने लिखा है कि वह ऐसी जगह काम नहीं कर सकती जहां उसके साथ दुव्र्यवहार हुआ, जहां कानून की अनदेखी हुई और जहां बजाए उसके करियर की सुरक्षा करने के उसे मानसिक, पेशेवर और आर्थिक रूप से चोट पहुंचाई गई।
यौन उत्पीडऩ के आरोप के बाद पचौरी को टेरी के महानिदेशक पद से हटा दिया गया था। वह संयुक्त राष्ट्र की अंतरसरकारी जलवायु परिवर्तन समिति और जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री की परिषद से भी हट गए।