23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जब फिदेल कास्त्रो ने इस नेता को दी नसीहत- इंदिरा के साथ करो छोटे भाई जैसा बर्ताव

कास्त्रो की ही वजह से भारत और क्यूबा के रिश्ते हमेशा से बेहद मजबूत रहे। इसका मुख्य कारण ये था कि कास्त्रो जवाहर लाल नेहरू का बहुत सम्मान करते थे, इंदिरा गांधी से भी उनके बहुत घनिष्ठ मित्रता थी।

less than 1 minute read
Google source verification

image

Rajeev sharma

Nov 27, 2016

फिदेल कास्त्रो के जाने से दुनिया की एक बहुत बड़ी हस्ती चली गई। क्यूबा एक छोटा सा देश है, लेकिन बतौर क्यूबा के क्रांतिकारी नेता कास्त्रो का प्रभाव पूरी दुनिया पर था।

कास्त्रो की ही वजह से भारत और क्यूबा के रिश्ते हमेशा से बेहद मजबूत रहे। इसका मुख्य कारण ये था कि कास्त्रो जवाहर लाल नेहरू का बहुत सम्मान करते थे, इंदिरा गांधी से भी उनके बहुत घनिष्ठ मित्रता थी।

गुट निरपेक्ष आंदोलन का सातवां समिट मार्च 1983 में दिल्ली में हुआ था, जिसमें गुट निरपेक्ष आंदोलन के अध्यक्ष का प्रभार फिदेल कास्त्रो को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सौंपना था। मैं तब गुट निरपेक्ष आंदोलन का महासचिव था।

कार्यक्रम के दौरान संबोधन के क्रम को लेकर फलस्तीनी नेता यासर अराफात नाराज हो गए और समिट छोड़ कर जाने लगे। इसकी जानकारी मैंने तत्काल इंदिरा गांधी को दी, उन्होंने कास्त्रो से बात की। कास्त्रो ने गुट निरपेक्ष आंदोलन के अध्यक्ष की हैसियत से यासर अराफात को विज्ञान भवन बुलाया, जहां यह कार्यक्रम होना था।

अराफात के वहां पहुंचते ही कास्त्रो ने सवाल किया कि क्या आप इंदिरा के मित्र हैं? इस पर अराफात ने जवाब दिया, मित्र? वह मेरी बड़ी बहन हैं और मैं उनके लिए कुछ भी कर सकता हूं।

कास्त्रो ने कहा कि फिर छोटे भाई की तरह व्यवहार करें और कार्यक्रम के शाम के सत्र में भी शामिल हों। यासिर ने ऐसा ही किया। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के समय मैं और राजीव गांधी दोनों क्यूबा गए थे।

ये भी पढ़ें

image