18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

#SpeakUP: एक सुर में बोली जनता- यूपी के विकास में बाधा है जातिवाद

पत्रिका उत्तर प्रदेश की मुहिम में जुड़े देश के युवा, खुलकर रखी अपनी बात...

2 min read
Google source verification

image

Hariom Dwivedi

Aug 29, 2016

SpeakUP

SpeakUP

लखनऊ. देश को नौ प्रधानमंत्री देने वाले यूपी की बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन है? सोशल साइट्स पर पत्रिका के कैंपेन से जुड़ते हुए भारी संख्या में लोगों ने अपने बहुमूल्य विचार रखे। इस मुद्दे पर जनता जनार्दन ने एक सुर से जातिवाद को जिम्मेदार ठहराया। आप भी पढ़िए फेसबुक पर आये लोगों के कुछ कमेंट-

Brajesh Kumar Singh: हम हिंदुस्तानियों का विकास असंभव है, क्योंकि हम जात-पात और सत्ता के लालच मे बंट चुके हैं। हिंदू कई भागों मे बंट गए हैं जिसका फायदा देश तोड़ने वालों को मिल रहा है।

Omkar Tiwari: जब जातिवाद के आधार पर मुख्यमंत्री चुनोगे तो यही होगा...

Vinay Dwivedi: क्या करें पिछले 27 सालों से जनता को विकास की नहीं जात-पात, हिंदू-मुस्लिम और अगड़े-पिछड़े की जरूरत थी। इसलिए भाजपा, सपा और बसपा की सरकार चुनती रही। अब अगर प्रदेश की जनता खुशहाली, विकास, अमन-चैन, भाईचारा, सद्भाव, सहिष्णुता, अहिंसा की चाहत रखती है तो उसे यूपी में सोच-समझकर वोट करनी होगी।

Manoj Singh: कौन कहता है विकास नहीं हुआ? अरे भाई पीएम ने विकास नहीं किया तो क्या हुआ, सीएम ने तो विकास किया ही है, जिसको विकास देखना हो वो मुलायम सिंह के गांव सैफई में जाकर विकास देखे। अगर उससे भी जी ना भरे तो मायावती जी के गांव बादलपुर का विकास देख लें। अब यूपी के अन्य गांव वाले मूर्ख वोटरों को कौन समझाये की मुर्खों विकास करवाना है तो अपने-2 गांव का मुख्यमंत्री बनाओ और अपने-2 गांव का विकास करवाओ और यही बात प्रधानमंत्री चुनने पर भी लागू होता है..

Hemant Prakash Verma: विकास का कोईं मोल नहीं जातिवाद के बल पर यहां पार्टियां चुनाव लड़ती हैं। हिन्दू-मुस्लिम दंगे कराके मंदिर-मस्जिद के नाम पर लड़ाके ही यहां पर पार्टियां चुनाव जीतती हैं। विकास तो सिर्फ राजनीति का एक हिस्सा बन कर रहा गया है। तुम तो तुम लूटो और हम आयेंगे तो हम भी लूटेंगे। उत्तर प्रदेश में यही चल रहा है बस...

Krishna Kishore Bhatia: जातिवाद व वंशवाद के रूप में समाजवाद। माया हो या कांग्रेस दोनों लगे रहे अपनों को सेट करने में।

Gyanendra Chaturvedi: पहले लोग पूरे देश के समग्र विकास के लिए सन्नद्ध रहते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। जात-पात की राजनीति के चलते क्षेत्रीय दल प्रभाव में आये, जिन्होंने केवल अपनी जाति या वर्ग को ऊंचा उठाने की कवायद की। उत्तर प्रदेश के किसी प्रधानमंत्री का शहर या गांव का विकास सैफई जैसा हुआ क्या? बहुजन से जब बात नहीं बनी तो मायावती ने सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय का नारा बुलंद किया लेकिन इसके क्रियान्वयन में ईमानदारी नहीं बरती उनका दलित एजेंडा ही प्रभावी रहा। शायद सर्वजन सुखाय का मतलब सभी जन सुखाय (सूख जांय) और उनके लोग मोटाय (मोटे हों) परिणाम सामने हैं।

Abhijeet Srivastav: ये तो कांग्रेस ही जाने क्योकि सबसे ज्यादा दिन प्रधानमन्त्री के रूप में नेहरू परिवार ने ही राज किया..

Ramu Pushpakar Nikhil: इसका जवाब तो राज्य सरकार को देना चाहिऐ क्योंकि केंद्र से मिलने वाली सहायता को इन्हें ही खर्च करनी होती है

ये भी पढ़ें

image