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पत्रिका संवादः मां-बहन की गाली यानी भारत मां को गाली 

मां-बहन की गाली देने का मतलब है अपने देश को गाली देना। यह कहना है युवाओं का। पत्रिका संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने मां-बहन की गाली न देने का संकल्प भी लिया।

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Bhanu Pratap Singh

Mar 07, 2016

women's day

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आगरा. ‘पत्रिका डॉट कॉम’ आगरा ने युवाओं के साथ महिला दिवस की पूर्व संध्या पर संवाद कायम किया। विषय था- मां-बहन की गाली क्यों देते हैं लोग। युवाओं का कहना था कि गुस्से का प्रकटीकरण है गाली। मां-बहन की गाली देने का मतलब है अपने देश को गाली देना। हम अपने देश को भारत मां कहते हैं, जो सबकी मां है। इसलिए आज से ही मां-बहन की गाली बंद। वैसे गाली तो देनी ही नहीं चाहिए।

भारत मां को गाली न दें
कंप्यूटर स़ॉफ्टवेयर विशेषज्ञ गौरव वार्ष्णेय का कहना है कि भड़ास निकालने के बहुत से तरीके हैं। मां-बहन की गाली देकर भारत मां को गाली न दें। जननी को गाली क्यों? गाली तो उल्टे हम पर ही पड़ती है। महिला सशक्तीकरण पर कहा कि पुरुष और महिला की बराबरी कभी हो नहीं सकती है। सबका अपना-अपना काम होता है। मां ही घर संभाल सकती है। पैसा कमाने के लिए दोनों को घर से बाहर निकलना पड़ता है और इसी कारण घरों में अंतरकलह हो रही है।

देखें वीडियो-

गाली देना दोहरा मापदंड
इंदिर गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से बीसीए कर रहीं और सेक्टर10 निवासी आकृति जैन का स्पष्ट मत है कि गाली नहीं देनी चाहिए। एक ओर तो हम देश को मां का दर्जा देते हैं और दूसरी ओर मां को गाली भी देते हैं। यह दोहरा मापदंड बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लड़कियों को शिक्षित किया जाए ताकि जरूरत पड़े तो किसी के भरोसे नहीं बैठना पड़े।

घर की इज्जत को ठेस क्यों
बीटेक छात्र शिवांक द्विवेदी बताते हैं कि महिला घर की इज्जत होती है। उसे ठेस पहुंचाने के लिए गाली दी जाती है। जब हम किसी को मां की गाली देते हैं तो हम अपने देश को गाली दे रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण बहुत जरूरी है। शहर में इतना अधिक महिला सशक्तीकरण हो गया है कि परिवार टूट रहे हैं। महिला अपने बॉस की तो सुन लेगी, लेकिन घर वालों की नहीं सुनती है।

घर की इज्जत होती हैं मां-बहन
हिन्दुस्तान कॉलेज, फरह (मथुरा) से बीटेक कर रहे वैभव प्रताप सिंह कहते हैं कि गाली देने का चलन पुराना है। गाली के माध्यम से लोग घर में घुस जाते हैं, भले ही रिश्ता हो या नहीं। मां-बहन घर की इज्जत होती हैं, लोगों को लगता है कि मां-बहन को बुरा बोलेंगे तो घर की इज्जत चली जाएगी। गाली देने का हक किसी को नहीं है।

गाली देना गलत, महिला सशक्तीकरण का दुरुपयोग
सिकंदरा निवासी विशाल यादव का कहना है कि गाली देना ही गलत है। मां-बहन की गाली का तो कोई मतलब नहीं बनता है। महिलाओं का सशक्तीकरण बहुत जरूरी है। देखा यह गया है कि शहरों में महिला सशक्तीकरण का दुपरुपयोग हो रहा है। लड़कियां, लड़कों को फंसा देती हैं। पुलिस भी लड़कों की बात सुनने को तैयार नहीं होती है। जब लड़का-लड़की पकड़े जाते हैं तो लड़की को छोड़ दिया जाता है और लड़के पर डंडे पड़ते हैं। यह कहां का न्याय है। दोनों को बराबरी की नजर से देखा जाना चाहिए।

गुस्सा दिखाना है तो गाली क्यों
बोदला निवासी रीतेश अग्रवाल ने बताया कि महिलाओं को केन्द्र में रखकर गाली देने की समस्या पुराने जमाने से है। गुस्सा दिखाना है तो गाली क्यों, किसी अन्य माध्यम से गलती का अहसास कराया जाना चाहिए। मैं गाली नहीं देता हूं। मां बहन की गाली तो बिलकुल नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार मिलें, लेकिन इतने अधिक नहीं कि हमारे ऊपर केस कर दें।

महिलाओं को गाली नहीं, इज्जत दो
आवास विकास कॉलोनी निवासी और वनस्थली जयपुर में अध्ययनरत मेघा द्विवेदी का मत है कि मां-बहन की गाली नहीं दी जानी चाहिए। क्रोध प्रदर्शित करने के अन्य तरीके भी हो सकते हैं। महिलाओं को इज्जत दो। ताज्जुब है कि महिलाओं को आज भी इज्जत की नजर से नहीं देखा जाता है।

महिला की ही गाली क्यों
सदर बाजार निवासी हिमांशी उपाध्याय ने तेज आवाज में कहा कि गाली नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने जानना चाहा कि आखिर महिला की ही गाली क्यों। उन्होंने कहा कि महिला यूं तो हर क्षेत्र में आगे है, लेकिन गांवों में अभी समस्य़ा है। गांवों में महिला को पढ़ाने के स्थान पर शादी कर देते हैं।


गाली देने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो
हिन्दुस्तान क़ॉलेज, फरह से बीटेक कर रहे सुशांत कौशल ने कहा कि महिलाओं को गाली नहीं देनी चाहिए। महिलाएं घर की इज्जत होती हैं। किसी को भी इज्जत उछालने का हक नहीं है। गाली देने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। महिला को घूरने वाले पर कार्रवाई हो सकती है तो गाली देने वाले पर क्यों नहीं। वे यह भी कहते हैं कि बलात्कार के आरोपी को सजा देते समय आयु सीमा समाप्त होनी चाहिए।

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