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18 माह के बच्चे ने गैस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी के बाद पहली बार चखा भोजन का स्वाद

Ahmedabad शहर के मनपा संचालित सरदार वल्लभभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एसवीपी अस्पताल) के चिकित्सकों ने एक बच्चे की अनूठी की है जिसे गुजरात की पहली सर्जरी बताया जा रहा है। 18 माह के इस बच्चे की गैस्ट्रिक पुल-अप नामक सर्जरी की गई। दरअसल, जन्म से ही इस बच्चे की अन्ननली में […]

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SVP Hospital

फाइल फोटो।

Ahmedabad शहर के मनपा संचालित सरदार वल्लभभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एसवीपी अस्पताल) के चिकित्सकों ने एक बच्चे की अनूठी की है जिसे गुजरात की पहली सर्जरी बताया जा रहा है। 18 माह के इस बच्चे की गैस्ट्रिक पुल-अप नामक सर्जरी की गई। दरअसल, जन्म से ही इस बच्चे की अन्ननली में ऐसी खामी थी कि भोजन इसमें होकर पेट तक नहीं पहुंच पाता था। चिकित्सकीय भाषा में इस समस्या को ईसोफेजियल एट्रेशिया कहा जाता है। सर्जरी के बाद जब इस बच्चे ने मुंह से भोजन लिया तो पूरे परिवार में खुशी छा गई। अस्पताल के चिकित्सकों का दावा है कि गुजरात में इस तरह की बच्चे की सर्जरी पहली बार की गई है। यह समस्या तीन से चार हजार बच्चों के जन्म में से किसी एक में होती है।

ईसोफेजियल एट्रेशिया एक गंभीर जन्मजात स्थिति है जिसमें अन्ननली अधूरी रहती है और भोजन पेट तक नहीं पहुंच पाता। बच्चे को जन्म के बाद कृत्रिम तरीकों से भोजन दिया जाता रहा। लेकिन जब बच्चा डेढ़ साल का हुआ और स्वास्थ्य स्थिर हुआ, तब डॉक्टरों की टीम ने दूरबीन पद्धति से गैस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी की। इस जोड़ (एनेस्टोमोसिस) से भोजन का प्राकृतिक मार्ग बन गया। पूरी प्रक्रिया छोटे-छोटे चीरे लगाकर दूरबीन और विशेष उपकरणों की मदद से की गई। एक तरह से पेट को खींचकर अन्ननली से जोड़ा गया। इस तकनीक से बच्चे को कम दर्द, तेज रिकवरी और प्राकृतिक तरीके से भोजन करने की क्षमता मिली।

सर्जरी के नौवें दिन मुंह से लिया भोजन

सर्जरी के नौवें दिन बच्चे ने पहली बार मुंह से भोजन किया। यह सर्जरी डॉ. सुधीर चांदना के नेतृत्व में डॉ. ताहा दागीनावाला, डॉ. रामेंद्र शुक्ला और डॉ. निसर्ग परिख ने की। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर निदान, सही रेफरल और योजनाबद्ध इलाज से ऐसे जटिल मामलों में भी उत्कृष्ट परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।